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बीजापुर। जिले का पीडिया गांव कभी नक्सलियों के दहशत के नाम से पहचाना जाता था, नक्सवाद के खात्में के बाद पीडिया गांव अब धीरे-धीरे विकास की मुख्य धारा से जुडऩे लगा है। अब यहां तक बीजापुर के कलेक्टर-एसपी सहित प्रसासनिक अमला आसानी से पहुंच पा रहा है। इस गांव के लिए अब तक का सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही है कि इस गांव में बिजली पहुंच चुकी है, इसके साथ ही ग्रामीणों को चिमनी युग से आजादी मिल चुकी है । ग्रामीणों के लिए सबसे अच्छी खबर यह भी है कि बिजली के साथ-साथ पीडिया तक अब बस संचालक भी शुरू हो चुका है । विदित हो कि 1980 से यह पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे में रहा। इस इलाके की 4 पंचायतों को जब तक नक्सलियों ने अपने कब्जे में रखा था तब तक इस इलाके में किसी का भी प्रवेश कर पाना मुश्किल हुआ करता था ।
नक्सली जब तेलंगाना आंध्र से बस्तर में पहुंचे थे, तो उन्होंने सबसे पहले पीडिया इलाके को ही अपना सबसे बड़ा बेस कैंप बना रखा था। साथ ही इन्हीं इलाकों में वे नए लड़को की भर्तियां किया करते थे और उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिया करते थे, परंतु अब इस इलाके की चारों पंचायतों के सभी गांवों तक सड़क और मूलभूत सुविधाओं के साथ सभी संसाधन पहुंचने लगे हैं । सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही की बसाहट से लेकर आज तक जिस गांव में बिजली नहीं पहुंच पाई थी वहां तक शासन बिजली पहुंचाने में सफल रहा है। ग्रामीणों के लिए सबसे अच्छी खबर यह भी है कि लाइट के साथ-साथ पीडिया तक अब बस संचालक भी शुरू हो चुका है जिसके कारण पीडिया और आसपास के पंचायत के ग्रामीण आसानी से जिला मुख्यालय तक पहुंच कर वापस लौट पाते हैं जबकि इसके पहले पैदल ही 70 किलोमीटर का सफर तय करना उनकी मजबूरी थी। इस इलाके को विकसित कर गांवों की पूरी तस्वीर बदलने के लिए बीजापुर से कोपागुडेम तक सीआरपीएफ के 11 कैंप स्थापित किए गए हैं जिसके कारण अब पूरा पीडिया क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ गया है।
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