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नारायणपुर। जिले में अदनार के जंगल में चलाए जा रहे सर्चिंग अभियन के दौरान आज रविवार को सुरक्षाबलों ने जमीन में गाड़कर छिपाए गए हथियारों का बड़ा नक्सली डंप बरामद किया है। बरामद विस्फोटकों को घने जंगलों के बीच प्लास्टिक से कवर कर रखा गया था।बरामद नक्सली डंप से 10 रायफल, 2 ग्रेनेड लॉन्चर, 13 जिंदा बीजीएल शेल, 16 जिंदा कारतूस, 2 किलोग्राम विस्फोटक एवं 1 टेलिस्कोपिक साइट मिला है।
नारायणपुर एसपी संदीप कुमार पटेल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नक्सल गतिविधियों के खात्में में महत्वपूर्ण सफलता मिलने के बावजूद सुरक्षाबल जंगलों में किसी भी तरह के पुराने हथियार डंप और विस्फोटक सामग्री को लेकर सतर्क हैं। नक्सलियों द्वारा लंबे समय से जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में छिपाकर रखे गए हथियारों और अन्य सामग्रियों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होने कहा कि पुराने नक्सली डंप की बरामदगी से क्षेत्र में मौजूद नक्सली गतिविधियों के अवशेषों को समाप्त करने में मदद मिलेगी। साथ ही जंगलों में छिपे हथियार और विस्फोटक भविष्य में किसी संभावित खतरे का कारण न बनें, इसके लिए सर्चिंग अभियान को लगातार जारी रखा जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार नारायणपुर एसपी संदीप कुमार पटेल, 129वीं वाहिनी बीएसएफ के कमांडेंट मुकेश कुमार के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आप्स) अक्षय सबद्रा के मार्गदर्शन में नारायणपुर पुलिस और 129वीं वाहिनी बीएसएफ की संयुक्त टीम अदनार क्षेत्र के जंगल में सर्चिंग अभियान पर निकली थी। ग्राम अदनार के उत्तर-पश्चिम दिशा में जवानों ने सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान सुरक्षा बलों को जंगल में नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखा गया पुराना डंप मिला। जवानों ने डंप की तलाशी ली तो उसमें एक .303 राइफल, चार .315 राइफल और पांच 12 बोर राइफल शामिल हैं। इसके अलावा दो बैरल ग्रेनेड लांचर और एक टेलिस्कोपिक साइट भी मिली है। तलाशी के दौरान 13 जीवित बीजीएल शेल, 12 बोर के 16 कारतूस और करीब दो किलो विस्फोटक भी बरामद किया गया।
नक्सल मुक्त हो चुके बस्तर को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अभियान के तहत उन स्थानों की भी तलाश की जा रही है, जहां नक्सलियों ने पहले हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक छिपाकर रखे थे। 31 मार्च के बाद भी बस्तर के अलग-अलग जंगलों में नक्सलियों द्वारा पहले छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक सुरक्षा बलों की सर्चिंग के दौरान मिल रहे हैं। नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा में हुई बरामदगियों से स्पष्ट है कि पुराने डंप की तलाश अभी भी सुरक्षा अभियानों का अहम हिस्सा बनी हुई है। इससे जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी।
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