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00 छग सरकार देगी 20-20 लाख, उमर सरकार 10 लाख के साथ जिला प्रशासन की ओर से की गई 6-6 लाख की तत्काल सहायता घोषित
रायपुर-नई दिल्ली। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार को पहलगाम जैसा हमला हुआ। आतंकवादियों ने ईंट-भ_े पर काम कर रहे प्रवासी मजदूरों के नाम पूछे। फिर छत्तीसगढ़ के दो हिंदुओं को समूह से अलग करके उनका धर्म पूछा और फिर गोली मार दी। हमले में एक मजदूर की मौके पर और दूसरे मजदूर की अस्पताल में मौत हो गई। मारे गए युवक की पहचान 24 साल के दीपक रात्रे और 28 साल के भूपेंद्र के रूप में हुई है। मृतकों के परिजन उनका अंतिम संस्कार गृहग्राम में लाकर करना चाह रहे थे लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से दोनों युवकों का अंतिम संस्कार कुलग्राम में किया गया। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के शैडो संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। घाटी में महज 10 दिनों के भीतर टारगेट किलिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है। इस आतंकी हमले को लेकर प्रदेश में चारों तरफ शोक की लहर है। लोगों में भारी आक्रोश है और वे आतंकियों के इस कायराना कृत्य की कड़ी निंदा कर रहे है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मृतक के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और उमर सरकार ने 10 लाख रुपये के साथ जिला प्रशासन के द्वारा 6-6 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि घोषित की गई।
अधिकारियों के अनुसार, हमला कुलगाम से करीब 20 किलोमीटर दूर केलाम में हुआ। इस दौरान 3-4 राउंड फायर किए गए। आतंकियों ने हमले से पहले रेकी करके ये इलाका चुना था। घटना के समय वहां कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे, लेकिन हिंदू सिर्फ यही दोनों थे। आतंकी हमले की खबर के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। गाडिय़ों की चेकिंग की जा रही है। वहीं पुलिस की गाडि?ां आतंकियों की तलाश में जुट गई हैं।
जानकारी के अनुसार, दीपक रात्रे सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड की ग्राम पंचायत बुंदेली के निवासी थे। करीब एक वर्ष पहले वे अपने पिता उमाशंकर रात्रे और परिवार के साथ मजदूरी करने जम्मू-कश्मीर गए थे। वहां वे एक ईंट-भ_े पर काम कर रहे थे। दीपक के साथ उनकी पत्नी और भाई भी वहीं रहकर मजदूरी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दीपक बचपन से अपने मामा के गांव हरदीडीह में रहकर पढ़ाई करते थे। उनकी शादी भी हरदीडीह गांव में ही हुई थी। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दीपक अपने पीछे पत्नी और एक छोटे बच्चे को छोड़ गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव में भी मातम का माहौल है। आतंकी हमले की सूचना मिलने के बाद जैजैपुर पुलिस हरदीडीह गांव पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। खबर मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने परिवार को ढांढस बंधाया तथा दिवंगत युवक को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी 28 साल के भूपेंद्र भैना तीन महीने पहले अपनी पत्नी कचरा बाई (24) के साथ केंद्र शासित प्रदेश में एक ईंट भट्टे पर काम करने के लिए अपने गांव छुईया से निकले थे। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने कहा कि दंपति ने अपने चार साल के बेटे को भूपेंद्र की दादी और नाबालिग बहन की देखभाल में छोड़ दिया था, जबकि उसके माता-पिता और भाई हिमाचल प्रदेश में मजदूरी करने गए हुए थे। उन्होंने कहा कि अधिकारी सुबह करीब 2 बजे भूपेंद्र के घर यह दुखद खबर देने पहुंचे। लेकिन, इस नाजुक समय को देखते हुए, पुलिस ने उसकी बूढ़ी दादी और छोटी बहन को तुरंत बताने के बजाय हिमाचल प्रदेश में उसके पिता से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि लोकल अधिकारी उसके शव को वापस लाने के लिए सभी जरूरी मदद के लिए पुलिस और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। शनिवार सुबह अपने भाई की मौत से अनजान, भूपेंद्र की बहन ने बताया कि वह कश्मीर सिर्फ इसलिए गया था क्योंकि परिवार को जरूरी चीजें जुटाने में मुश्किल हो रही थी।
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