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00 महाराष्ट्र मंडल में आयोजित तीज महोत्सव में पद्मश्री यादव ने दिया प्रेरक संबोधन
00 महिला केंद्रों ने कई राज्यों की झांकियों से प्रस्तुतियों से जीवंत किया भारत
रायपुर। महिला सशक्तीकरण की दिशा में कई दशकों से प्रेरक काम कर रही पद्मश्री फुलबासन बाई ने कहा कि जीवन में धन- दौलत की कोई अहमियत नहीं है। महत्व है तो सिर्फ अपनों के बीच दूसरी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का, उनकी तकलीफों, दु:ख- दर्द को दूर करने का। उन्होंने कहा कि पद्मश्री का सम्मान लेने के बाद उन्हें सैकड़ों कार्यक्रमों में विशेष रूप से बुलाकर सम्मानित किया गया। इससे उन्हें नौ करोड़ रुपये मिले लेकिन आज तक न तो वो नौ करोड़ रुपये में से नौ रुपये अपने घर ले गईं और न ही अपने या अपने परिवार पर यह राशि खर्च की।
महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित तीज महोत्सव में मुख्य अतिथि की आसंदी से फुलबासन ने कहा कि इनाम की राशि से उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबी समितियां बनाई और सैकड़ों स्व. सहायता समिति बनाकर विभन्नि तरीकों से आय अर्जित करने के उपाय बताए। इसके अलावा उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर 50 लाख रुपये, जीते। इसका उपयोग भी महिलाओं के उत्थान के लिए किया गया। यही कारण है कि आज भी उनके पति खेतों में उतरकर हल चलाते हैं, दूध दुहते हैं और दूध बेचते हैं। फुलबासन के अनुसार जब भी किसी महिला पर अत्याचार होता है, तो उसके पीछे किसी महिला का ही हाथ होता है। हम एक- दूसरे की टांग खींचना छोड़कर एक- दूसरे की मदद कर उसे आगे बढ़ाने में मदद करें।
मंडल अध्यक्ष अजय काले ने कहा कि हम लोग छोटे- छोटे प्रॉब्लम से डर जाते हैं। हमने पहले सिंधुताई सपकाल को सुना है और आज हमें फुलबासन का प्रेरक संबोधन सुनने का मौका मिल रहा है। इससे हमें मंथन करना चाहिए कि आखिर इतने संघर्ष के बाद भी अपने जीवन को दूसरे के लिए प्रेरणास्पद कैसे बनाया जा सकता है। उपाध्यक्ष गीता दलाल ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित किया और कहा कि फुलबासन बाई की जीवनी व जीवनशैली को सुनने के बाद हमें अपने जीवन के लिए भी बेहतर सेवाभावी और आदर्श जीवन का संकल्प लेना होगा।
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