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क्रिकेट प्रेमियों के लिए उनके मनोरंजन के हिसाब से टेस्ट क्रिकेट के अलावा वन डे और टी-20 फॉर्मेट के मैच इजाद हो गए है।भविष्य में इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि टी-10 मैच की भी शुरूआत हो जाए। क्रिकेट खेलने और समझने वाले प्रबुद्ध दर्शकों के लिए क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में टेस्ट क्रिकेट की अहमियत सबसे ज्यादा है क्योंकि बैट्समैन और बॉलर की सही परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में ही होती है। माना जाता है कि क्रिकेट की समझ, धैर्य और सहनशक्ति की असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में ही होती होती है।
सामान्य क्रिकेट प्रेमियों जिनका जन्म बीसवीं शताब्दी के छठे दशक के बाद हुआ है उन्हें ये जानकारी होगी कि टेस्ट क्रिकेट का अर्थ पांच दिन खेले जाने वाला क्रिकेट मैच है।यह भी जानकारी होगी कि एक जमाने में टेस्ट क्रिकेट के पांच दिवसीय खेल के बीच में एक दिन विश्राम का हुआ करता था।
आइए, आपको ऐसे सच से सामना करवाते है जिससे आपको जानकारी होगी कि टेस्ट क्रिकेट पांच दिन का नहीं बल्कि दो, तीन, चार के अलावा छह, आठ और टाइमलेस भी हुआ करता था।
15 मार्च 1877 को एक मैच खेला गया था, मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में। दो टीम आपस में खेली थी।ऑस्ट्रेलिया की टीम का नाम था कंबाइंड ऑस्ट्रेलिया इलेवन और इंग्लैंड की टीम का नाम था - जेम्स लिली व्हाइट इलेवन। इन दोनों टीम को इतिहास में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड मान लिया गया। ये मैच 15,16 17 और 19 मार्च 1877 को खेला गया।18 मार्च को संडे होने के कारण विश्राम का दिन रखा गया। आगे चलकर संडे के दिन टेस्ट में विश्राम रहता था।इसका कारण ये था कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में सभी क्रिचियंस चर्च जाते है, सो संडे विश्राम का दिन बन गया।दूसरा कारण ये था कि संडे अवकाश का दिन होता है इस कारण दर्शक परिवार को समय दे, ये भी सोच थी।
टेस्ट क्रिकेट के शुरुवात में इंग्लैंड, अपने देश में तीन दिन का ही टेस्ट खेला करता था। टेस्ट खेलने देश भी 1877 से 1888 तक केवल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ही थे। 1889 में इंग्लैंड की टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गई। 12 मार्च 1889 को पहला टेस्ट खेला गया जिसकी अवधि केवल दो दिन था, याने दो दिवसीय टेस्ट,
1928 में इंग्लैंड की टीम वेस्ट इंडीज के दौरे पर गई।दोनों देशों के बीच खेला गए टेस्ट सीरीज में टेस्ट तीन दिवसीय ही था।1929 में इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर गई यहां भी तीन दिन का ही टेस्ट क्रिकेट खेला गया। 1932 में हिंदुस्तान की क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर दो, तीन और चार दिन के भी टेस्ट क्रिकेट !
क्रिकेट प्रेमियों के लिए उनके मनोरंजन के हिसाब से टेस्ट क्रिकेट के अलावा वन डे और टी-20 फॉर्मेट के मैच इजाद हो गए है।भविष्य में इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि टी-10 मैच की भी शुरूआत हो जाए। क्रिकेट खेलने और समझने वाले प्रबुद्ध दर्शकों के लिए क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में टेस्ट क्रिकेट की अहमियत सबसे ज्यादा है क्योंकि बैट्समैन और बॉलर की सही परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में ही होती है। माना जाता है कि क्रिकेट की समझ, धैर्य और सहनशक्ति की असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में ही होती है।
सामान्य क्रिकेट प्रेमियों जिनका जन्म बीसवीं शताब्दी के छठे दशक के बाद हुआ है उन्हें ये जानकारी होगी कि टेस्ट क्रिकेट का अर्थ पांच दिन खेले जाने वाला क्रिकेट मैच है।यह भी जानकारी होगी कि एक जमाने में टेस्ट क्रिकेट के पांच दिवसीय खेल के बीच में एक दिन विश्राम का हुआ करता था।
आइए, आपको ऐसे सच से सामना करवाते है जिससे आपको जानकारी होगी कि टेस्ट क्रिकेट पांच दिन का नहीं बल्कि दो, तीन, चार के अलावा छह, आठ और टाइमलेस भी हुआ करता था।
15 मार्च 1877 को एक मैच खेला गया था, मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में। दो टीम आपस में खेली थी।ऑस्ट्रेलिया की टीम का नाम था कंबाइंड ऑस्ट्रेलिया इलेवन और इंग्लैंड की टीम का नाम था - जेम्स लिली व्हाइट इलेवन। इन दोनों टीम को इतिहास में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड मान लिया गया। ये मैच 15,16 17 और 19 मार्च 1877 को खेला गया।18 मार्च को संडे होने के कारण विश्राम का दिन रखा गया। आगे चलकर संडे के दिन टेस्ट में विश्राम रहता था।इसका कारण ये था कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में सभी क्रिचियंस चर्च जाते है, सो संडे विश्राम का दिन बन गया।दूसरा कारण ये था कि संडे अवकाश का दिन होता है इस कारण दर्शक परिवार को समय दे, ये भी सोच थी।
टेस्ट क्रिकेट के शुरुवात में इंग्लैंड, अपने देश में तीन दिन का ही टेस्ट खेला करता था। टेस्ट खेलने देश भी 1877 से 1888 तक केवल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ही थे। 1889 में इंग्लैंड की टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गई। 12 मार्च 1889 को पहला टेस्ट खेला गया जिसकी अवधि केवल दो दिन था, याने दो दिवसीय टेस्ट,
1928 में इंग्लैंड की टीम वेस्ट इंडीज के दौरे पर गई।दोनों देशों के बीच खेला गए टेस्ट सीरीज में टेस्ट तीन दिवसीय ही था।1929 में इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर गई यहां भी तीन दिन का ही टेस्ट क्रिकेट खेला गया। 1932 में हिंदुस्तान की क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर इकलौता टेस्ट खेलने गई।ये टेस्ट भी तीन दिवसीय ही था। 1952 में पाकिस्तान की टीम हिंदुस्तान के दौरे पर आई।दोनों देश के बीच खेला गए टेस्ट सीरीज में तीन दिवसीय टेस्ट ही था।कलौता टेस्ट खेलने गई।ये टेस्ट भी तीन दिवसीय ही था।
1973 तक चार दिवसीय टेस्ट खेले जाते रहे।1979 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने अंतिम रूप से ये निर्णय ले ही लिया कि टेस्ट मैच की अवधि पांच दिन रहेगी।
1877 से 1973 तक दो,तीन, चार, पांच दिवसीय टेस्ट नियमित रूप से होते रहे। इसके अलावा छह, सात, आठ नौ और दस दिवसीय टेस्ट भी क्रिकेट इतिहास में दर्ज है।
टेस्ट इतिहास में अनेक ऐसे अवसर आए जब ज्यादातर प्राकृतिक कारणों से मैच में खेल नहीं हो पाया तो टेस्ट खेलने के दिन बढ़ते गए। इस कारण छ: से दस दिन का मैच भी खेला गया। छ: दिन खेले जाने वाले टेस्ट की संख्या 75 है। इसी प्रकार सात दिन खेले जाने वाले टेस्ट की संख्या 6 है ।एक एक टेस्ट 8,9 और 10 दिन भी चले है। 99 टेस्ट टाइमलेस टेस्ट खेले गए है याने निर्णय निकलते तक।इसमें सबसे अधिक रोमांचक मैच दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच डरबन में 3 से 14 मार्च तक खेला गया। नब्बे घंटे तक ये टेस्ट चला लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया। इस टेस्ट में 1981 रन बने। छ: शतक और 11 अर्ध शतक लगे।इंग्लैंड के स्पिनर हेडली वेरिटि ने दोनों पारियों में अकेले 95.6ओवर फेंके(8 बॉल का एक ओवर होता था)। मैच इस कारण ड्रॉ रहा क्योंकि इंग्लैंड के खिलाडिय़ों की वापसी के लिए पानी जहाज के जाने का समय हो गया था। खिलाड़ी एक के बाद स्टेडियम से सीधा पोर्ट जा रहे थे।
कुछ अर्सो से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल चार दिवसीय टेस्ट के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है खासकर उन टीम के लिए जो फिलहाल वनडे और टी ट्वेंटी मैच खेल रहे है। दक्षिण अफ्रीका ने 2017 में जिम्बाब्वे और इंग्लैंड ने आयरलैंड के साथ 2019 और 2023 में चार दिन का टेस्ट खेला है। इस प्रकार के टेस्ट में पांच दिवसीय टेस्ट के समान हर दिन 90 ओवर के बजाय 98 ओवर फेंके जाते है।फालोआन के लिए 200 के बजाय 150 रन का अंतर रखा गया है।
0- संजय दुबे
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