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देश-प्रदेश से नक्सल आतंक का सफाया होना इन सभी बलिदानी विभूतियों को सच्ची श्रद्धांजलि है - गृहमंत्री शर्मा

13 May 2026   5 Views

देश-प्रदेश से नक्सल आतंक का सफाया होना इन सभी बलिदानी विभूतियों को सच्ची श्रद्धांजलि है - गृहमंत्री शर्मा

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00 लोकतंत्र और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों को कभी भी राजनीति का उपकरण नहीं बनने देना चाहिए
00 कांग्रेस आंतरिक और वाह्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीति करने से बजे
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में बुधवार को नक्सल उन्मूलन प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इस दौरान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय ने विस्तृत जानकारी दी, जिसका वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने समर्थन किया। गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश की पहचान के साथ नासूर की तरह जुड़े माओवादी आतंक का सफाया होना डबल इंजन सरकार की एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि जिसे देश की शीर्ष उपलब्धियों में से एक के रूप में हमेशा स्मरण किया जाएगा। भारत की आंतरिक सुरक्षा पर सबसे बड़ी चुनौती करार दिए गए इस कम्यूनिस्ट आतंक की समाप्ति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी और डबल इंजन की सरकार के कारण संभव हो पाया है। समयबद्ध तरीके से 31 मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन के संकल्प को सिद्ध कर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बना दिया है। नक्सल उन्मूलन की इस सफलता के पीछे हमारे सुरक्षा बलों का योगदान भी अभिनंदनीय है। हमारे सुरक्षा बलों, प्रदेश के दर्जनों नेताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, हजारों आदिवासियों के बलिदान के बाद यह संभव हो पाया है। भाजपा के भी सौ से अधिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधि, विधायक आदि ने इस नक्सल हमलों में अपने प्राणों की आहुति दी है। देश-प्रदेश से नक्सल आतंक का सफाया होना इन सभी बलिदानी विभूतियों को सच्ची श्रद्धांजलि है। लोकतंत्र और भारतीय संविधान की रक्षा की दृष्टि से यह उपलब्धि मील का पत्थर है। 
भाजपा का यह स्पष्ट मत है कि आतंक किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता। लोकतंत्र और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों को कभी भी राजनीति का उपकरण नहीं बनने देना चाहिए। निहित राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसे आतंक को आसरा और प्रश्रय देने वाले राजनीतिक दलों को भी इससे सबक लेते हुए अपने संविधान विरोधी हरकतों से बाज आना चाहिए। नक्सल उन्मूलन की यह महान उपलब्धि केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन की सरकार के कारण मिलना संभव हुआ है। विश्व के सबसे बड़े नेता हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी, गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का इस्पाती संकल्प और हमारे वीर जवानों की भुजा की ताकत से भारत की इस आतंक का सफाया संभव हो पाया है। 
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के सफाए के संकल्प के बाद सभी जी-जान से जुट गए थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव सायजी के नेतृत्व में हमने एक बेहतर पुनर्वास नीति बनायी। पूना मारगेम- पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के माध्यम से हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं को पुनर्वास, सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास के वातावरण को और अधिक सुद्ढ बनाना है, कि बस्तर क्षेत्र में शांति और प्रगति की नई संभावनाएँ साकार हो सकें। हमने मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों को यह विश्वास दिलाया कि वे अगर हिंसा हथियार त्याग देंगे तो शासन उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्जवल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। हर वह उपाय किये गए जिससे स्थायी रूप से वे मुख्यधारा के जीवन से जुड़ सकें। 
30 मार्च 2026 को लोकसभा में श्री अमित शाहजी ने स्पष्ट किया कि एक समय जो वामपंथी उग्रवाद 12 राज्यों तक फैला हुआ था, देश के लगभग 17' भूभाग को प्रभावित करता था और करोड़ों लोगों को अपने प्रभाव क्षेत्र में रखता था, वह अब सिमटकर दो जिलों तक रह गया है। हम नक्सल मुक्त हो गए हैं। देश भर के नक्सल आतंक का 70 प्रतिशत से अधिक छत्तीसगढ़ और ख़ास कर बस्तर में बचा हुआ था, अब इस आतंक की समाप्ति के बाद बस्तर के जनजातीय बन्धु भी प्रदेश के विकास के साथ-साथ चल पायेंगे। 
सामन्यतया यह बताया जाता रहा है कि नक्सलवाद को वंचितों का आंदोलन या विकास की विफलता का परिणाम था, लेकिन यह व्याख्या पूर्ण नहीं है। यदि गरीबी ही इसका मूल कारण होती, तो देश के अनेक ऐसे क्षेत्र जहाँ आर्थिक पिछड़ापन समान या उससे अधिक था, वो नक्सलवाद के केंद्र बनते। परंतु ऐसा नहीं हुआ। कुछ विशिष्ट क्षेत्र ही इसके प्रभाव में आए, और वही क्षेत्र दशकों तक इसके मुख्य आधार बने रहे। यह चयन संयोग नहीं कहा जा सकता। वास्तव में नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जिसने उन क्षेत्रों को चुना जहाँ राज्य की उपस्थिति सीमित थी और जहाँ अपने लिए आधार निर्मित करना संभव था। जिस तंत्र को अक्सर विकास की प्रतिक्रिया कहा जाता है, वह स्वयं विकास को बाधित करने वाला कारक भी रहा है। 
यहां यह बात स्पष्ट तौर पर कहना होगा कि माओवादी आतंक को कांग्रेस द्वारा आसरा और प्रश्रय दिया जाता रहा है। जिस विकास की कमी को बहाना बनाया गया उस कमी की जिम्मेदार भी कांग्रेस ही रही है क्योंकि जब-जब और जहां जहां माओवादियों को पैर पसारने का बहाना मिला, वहां-वहां तब कांग्रेस या उसके सहयोगी दलों का शासन ही था। बात चाहे नक्सलवाडी की हो, बिहार, आन्ध्र प्रदेश या अविभाजित मध्यप्रदेश की, हर जगह उस समय कांग्रेस का ही शासन रहा। इसके अलावा अनेक ऐसे साक्ष्य चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कांग्रेस ने न केवल अपने बयानों से बल्कि कृत्यों से भी नक्सलवाद को खाद पानी देने, उसे संरक्षण देने का काम किया है। चाहे आदिवासियों के आन्दोलन 'सलवा जुडूमÓ को हतोत्साहित करने का विषय हो या उसके विरुद्ध फैसला देने वाले जज को कांग्रेस द्वारा उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाना, राहुल गांधी जी द्वारा झीरम हमले में नक्सलियों को क्लीन चिट देने का मामला हो या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा झीरम का साक्ष्य जेब से नहीं निकालना, कांग्रेस के तमाम नेताओं द्वारा नक्सल समर्थक बयान दिलवाना हो या यूपीए के शासन में शहरी नक्सलियों को बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां देना, कांग्रेस ने हमेशा न केवल माओवादी विरोधी लड़ाई को कमजोर करने का काम किया बल्कि उसे प्रश्रय भी देते रहे। 
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 से 2023 के बीच 5 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, इस दौरान भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे। भूपेश बघेल की सरकार के दौरान कई ऐसे मामले देखने को मिले, जो स्पष्ट रूप कांग्रेस सरकार द्वारा माओवादियों के प्रति 'सॉफ्ट कॉर्नरÓ की भावना और परोक्ष सहयोग को उजागर करती है। यह सिलसिला शुरू हुआ वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से। कांग्रेस के लोग चुनाव में भी नक्सलियों से समर्थन मांगने से परहेज नहीं करते थे। जब इन नक्सलियों का ख़ात्मा किया जा रहा था, तब माओवादी समर्थकों के साथ-साथ कांग्रेस के नेता भी $फोर्स पर $फजऱ्ी एंकाउंटर का आरोप लगा रहे थे। नक्सल एनकाउंटर के बाद कांग्रेस पार्टी ने अलग-अलग मोर्चों से इस एनकाउंटर को फर्जी बताने से लेकर माओवादी आतंकियों को शहीद बताने का काम किया था। 
कांग्रेस की सरकार के समय भारत की आंतरिक सुरक्षा पर सबसे बड़ी चुनौती करार दिए गए माओवादी आतंक का खात्मा वास्तव में एक ऐसी उपलब्धि है जिसने हमारे लोकतंत्र को अत्यधिक सशक्त बनाया है, साथ ही भारतीय संविधान को भी उन क्षेत्रों में भी लागू होना संभव हुआ है जहां इससे पहले माओवादियों की अनुमति के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता था।
इस महान उपलब्धि के लिए नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को अशेष अभिनन्दन। साथ ही कांग्रेस के लिए एक और सबक कि आंतरिक और वाह्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीति करने से वह बाज आये। कांग्रेस को यह ध्यान रखना होगा कि क्षुद्र राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे आतंक को प्रश्रय न दे।

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