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रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को आदिवासी हितों पर सवाल उठाने से पहले अपना राजनीतिक इतिहास देखना चाहिए। जिन कानूनों और अधिकारों की आज कांग्रेस बात कर रही है, उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा स्वयं कांग्रेस की नीयत और नीतियां रही हैं।
वनमंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक समझकर राजनीति की, लेकिन उन्हें उनके अधिकारों, संसाधनों और विकास से जोड़ने का ईमानदार प्रयास कभी नहीं किया। आज जब छत्तीसगढ़ में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, वनाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, तब कांग्रेस इसे भी राजनीतिक चश्मे से देख रही है।
उन्होंने कहा कि दीपक बैज और कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद PESA और वनाधिकार कानून का लाभ अंतिम व्यक्ति तक क्यों नहीं पहुंच सका। आदिवासी क्षेत्रों में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आजीविका के अवसरों का अभाव किसकी देन था, यह देश अच्छी तरह जानता है।
वन मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का वास्तविक दर्द आदिवासी अधिकार नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में उसका लगातार सिकुड़ता जनाधार है। आज वनवासी समाज जागरूक हो रहा है, अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रहा है और विकास प्रक्रिया में भागीदार बन रहा है, यही बात कांग्रेस को परेशान कर रही है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी गौरव, आदिवासी अधिकार और आदिवासी विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ कार्य कर रही है। कांग्रेस के आरोप तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और आदिवासी समाज को भ्रमित करने का असफल प्रयास हैं।
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