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जगदलपुर। बस्तर में बारिश के बीच कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात पर पर्यटकों की लापरवाही सामने आई है। जलप्रपात का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बावजूद कई पर्यटक प्रतिबंधित और जोखिम वाले हिस्से में उतरकर नहाते नजर आए। उन्हें रोकने पहुंची वन विभाग की टीम और पर्यटकों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान एक फॉरेस्ट कर्मचारी के डंडा चलाने का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस मामले में वन विभाग का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें लगातार समझाइश दी जा रही थी, लेकिन बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कुछ लोग जोखिम भरे क्षेत्र में जाने से नहीं माने।
वायरल वीडियो तीरथगढ़ जलप्रपात का बताया जा रहा है, जहां लगातार बारिश के कारण पानी का बहाव तेजी से बढ़ रहा है। मानसून के दौरान यहां जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद कुछ पर्यटक प्रतिबंधित और जोखिम वाले हिस्से में पहुंच गए और चट्टानों पर उतरकर नहाने लगे। बताया जा रहा है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने पर्यटकों को कई बार वहां से हटने और सुरक्षित स्थान पर जाने की समझाइश दी, लेकिन चेतावनी के बावजूद वे नहीं माने। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पर्यटकों को रोकने के दौरान बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला काफी गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। वायरल वीडियो में एक फॉरेस्ट कर्मचारी को डंडा उठाते हुए भी देखा जा सकता है। इसी घटना के दौरान वहां मौजूद अन्य पर्यटकों ने अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग पर्यटकों की लापरवाही को जिम्मेदार बता रहे हैं, तो कुछ लोग फॉरेस्ट स्टाफ के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।
तीरथगढ़ जलप्रपात में पर्यटकों की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल भी कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें लोग जलप्रपात के ऊपरी हिस्से और फिसलन भरी चट्टानों पर खड़े होकर फोटो खिंचवाते और नहाते नजर आए थे। जिसे देखते हुए वन विभाग समय-समय पर चेतावनी जारी करता रहा है कि बारिश के मौसम में जलप्रपात का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में कुछ सेकंड की लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।विदित हाे कि बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला पानी अचानक बढ़ जाता है। कई बार ऊपर के इलाकों में हो रही बारिश का अंदाजा नीचे मौजूद लोगों को नहीं लग पाता और कुछ ही मिनटों में पानी का बहाव कई गुना बढ़ जाता है। तीरथगढ़ जलप्रपात के आसपास की चट्टानें भी लगातार पानी गिरने के कारण बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं। ऐसे में वहां उतरना या नहाना जानलेवा साबित हो सकता है।
वन विभाग की रेंजर नीतू ठाकुर ने बताया कि बारिश के मौसम में तीरथगढ़ जलप्रपात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलप्रपात के खतरनाक हिस्सों में बैरिकेड्स लगाए गए हैं और पर्यटकों को लगातार सावधानी बरतने की समझाइश दी जाती है। इसके बावजूद कई लोग नियमों का उल्लंघन कर प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं। उन्हाेने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल लोगों को खतरे वाले क्षेत्र से हटाना था ताकि कोई हादसा न हो। इसी दौरान पर्यटकों और कर्मचारियों के बीच कहासुनी हो गई थी। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी संबंधित थाने को भी दे दी गई है।
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