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तालाब में डूब रहे दो बच्चों को बहादुर महिला बनलता शुक्ला ने बचा लिया

23 Oct 2026   34 Views

** बहादुर महिला बनलता शुक्ला अपने परिवार के साथ
** बहादुर महिला बनलता शुक्ला अपने परिवार के साथ

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0-बोरिया रोड स्थित कांदुल तालाब में विसर्जन के दौरान की घटना

 

 

रायपुर। दुर्गा विसर्जन के दौरान इतना शोरगुल था कि दो बच्चे तालाब में डूब रहे थे और किसी का ध्यान नहीं था,तब जबकि एक महिला जोर-जोर से चिल्लाकर मदद मांग रही थी जब देखा कि कोई सुनने वाला नहीं खुद तालाब में छलांग लगा दी। बोरिया रोड स्थित कांदुल तालाब की घटना है। उनके इस साहस से दो जिंदगियां बच गईं। बचाए गए दोनों किशोरों की पहचान 12 वर्षीय तुषार साहू और 17 वर्षीय लक्की साहू के रूप में हुई है, जो संतोषी नगर क्षेत्र के हनुमान नगर के निवासी हैं। वकई मां दुर्गास्वरूपा बनकर बच्चों की जान बचाने पर महिला बनलता शुक्ला की चारो तरफ प्रशंसा हो रही है।  

बनलता बताती हैं कि बचपन में सीखी तैराकी इस उम्र में उनके काम आई। तालाब के बीच में दोनों किशोर बचाव के लिए इशारे कर रहे थे। बनलता के कूदने के बाद अन्य लोग भी सहयोग के लिए आगे आए और सभी ने मिलकर दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बनलता गृहिणी हैं और पेशे से वकील अरविंद शुक्ला की पत्नी हैं। दो बेटियों ऋचा और रिया की मां हैं। बड़ी बेटी स्कूल टीचर है और छोटी बेटी कॉलेज में पढ़ रही है। बनलता ने कहा, मैं गृहिणी हूं। गोसेवा और अन्य पशुओं की सेवा करती हूं। पशुओं को भोजन-पानी, पक्षियों को दाना-पानी देती हूं। मुझे कभी अपनी जान की परवाह नहीं रही। मैं हमेशा लोगों की मदद करने में विश्वास रखती हूं। शायद इसी सोच के कारण मैं किसी की जान बचा सकी।

बनलता ने इस विषम परिस्थिति में भी गजब की सूझबूझ दिखाई। उन्होंने बताया, मुझे पता था कि अगर वो लड़का मेरा हाथ पकड़ेगा तो संतुलन बिगड़ जाएगा और उसके कारण मैं भी उनके साथ डूब सकती हूं। हालांकि मुझे तैरना आता है पर चुनौती बड़ी थी। मैंने बड़े लड़के लक्की का हाथ पकड़कर बाहर निकालने का प्रयास किया। लक्की ने तुषार का हाथ पकड़ा हुआ था। तालाब किनारे खड़े लोग भी मदद के लिए कूद पड़े और सबने मिलकर दोनों बच्चों को बचा लिया।

** पति व बच्चों ने मां दुर्गा को दिया धन्यवाद...

बनलता के पति अरविंद शुक्ला का कहना है कि विजयादशमी पर पत्नी का सुरक्षित घर लौट आना ही उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने कहा, दोनों बेटियों की मां और मेरी पत्नी बच गई, इसके लिए माता का धन्यवाद। वह अभी भी सहज नहीं हो पा रहे हैं कि यदि पत्नी को कुछ हो जाता तो परिवार का क्या होता। बनलता की इस बहादुरी की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

 

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