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0-बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा; 2013 में साथी पत्रकार ने आरोप लगाया था
पणजी-बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को रेप केस में दोषी करार दिया। कोर्ट आज ही सजा सुनाएगी। तेजपाल ने कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
इससे पहले मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में तेजपाल को बरी कर दिया था। मामला नवंबर 2013 का है। तहलका की महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित थिंक फेस्ट के दौरान 7 और 8 नवंबर की रात होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने दो बार उनका यौन उत्पीडऩ किया।
महिला पत्रकार ने सबसे पहले तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ई-मेल भेजकर शिकायत की। इसमें उन्होंने लिखित माफी, पूरे स्टाफ के सामने घटना स्वीकार करने और आंतरिक यौन उत्पीडऩ शिकायत समिति गठित करने की मांग की थी।मामला सार्वजनिक होने के बाद गोवा पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेकर एफआईआ दर्ज की और जांच शुरू की। जांच में सीसीटीवी फुटेज, ई-मेल और गवाहों के बयान समेत अन्य साक्ष्य जुटाए गए। इसके बाद तेजपाल की गिरफ्तारी हुई।
अभी की जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट का मानना है कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की बजाय घटना के बाद पीडि़त महिला के व्यवहार पर ज्यादा ध्यान दिया। साथ ही, तेजपाल के माफी मांगने वाले ई-मेल जैसे अहम सबूतों को भी सही अहमियत नहीं दी।कोर्ट ने तेजपाल को आईपीसी की धारा 376(2)(एफ), 376(2)(के), 354्र और 354 ए के तहत दोषी माना है। ये धाराएं रेप, यौन उत्पीडऩ और महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला करने से संबंधित हैं। फैसले की पूरी डिटेल सामने नहीं आई है।
तेजपाल के वकील ने कहा, मामला 13 साल पुराना है, उनकी उम्र 62 साल है। उनके खिलाफ कोई दूसरा आपराधिक मामला नहीं है। हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। ट्रायल कोर्ट ने 21 मई 2021 को तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था, 'अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इस फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि निचली अदालत ने सबूतों को सही से नहीं समझा और पीडि़त की गवाही का गलत आकलन किया। (साभार-भास्कर)
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