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कीचड़, मलबे और लगातार बदलते मौसम के बीच बचावकर्मी उन लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। शनिवार को कुछ समय के लिए रुका सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया।
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव का काम अभी थमा नहीं है। कीचड़, मलबे और लगातार बदलते मौसम के बीच बचावकर्मी उन लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
शनिवार को कुछ समय के लिए रुका सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया। बारिश और घने कोहरे के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही थीं, लेकिन मौसम में थोड़ी राहत मिलते ही हेलीकॉप्टर फिर से आसमान में नजर आए। जमीन पर बचाव दल मलबे और तबाह हो चुकी संरचनाओं के बीच संभावित जीवित लोगों की तलाश करते रहे। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा और नुवाकोट शामिल हैं। इन पहाड़ी क्षेत्रों में हालात खास तौर पर चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि कई जगहों पर रास्ते टूट गए हैं और भारी मलबे ने पहुंच को मुश्किल बना दिया है।
बुधवार को ग्लेशियर के टूटने के बाद पहाड़ी नदी तंत्र में अचानक पानी का सैलाब उमड़ पड़ा। यह सामान्य बाढ़ नहीं थी। पानी के साथ चट्टानें, बर्फ, मिट्टी और भारी मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि रास्ते में आने वाली इमारतें, पुल और बिजलीघर तक इसकी चपेट में आ गए। कुछ ही समय में कई इलाकों का पूरा भूगोल बदल गया। जहां पहले सड़कें और पुल लोगों को जोड़ते थे, वहां अब मलबे का ढेर दिखाई दे रहा है। बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कई जगहों पर पहुंचने के रास्ते खुद बाढ़ में बह चुके हैं।
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