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00 प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय का तीखा हमला : अपनी ही जेब में सबूत लिये फिरने वाले बघेल के सामने चुप्पी ओढ़े बैज अब किस मुँह से उप मुख्यमंत्री शर्मा से माफी की माँग कर रहे हैं?
रायपुर। आज जब बस्तर नक्सलमुक्त होकर शान्ति व विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज झीरम घाटी के हृदयविदारक नक्सली हमले पर घडिय़ाली आँसू बहाकर अत्यंत शर्मनाक राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और दीपक बैज के इस रवैये पर तीखा हमला बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने कहा है कि जो कांग्रेस सरकार अपने पाँच सालों के शासनकाल में न तो देश और प्रदेश के जवानों के बलिदान का सम्मान कर सकी और न ही शहीदों के परिजनों को न्याय दे सकी, उसके नेता किस मुँह से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा से प्रायश्चित और माफी की माँग कर रहे हैं?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने सवाल किया क् िबैज में अगर ज़रा सी भी नैतिक हिम्मत है, तो वे यह बताएँ कि उन्होंने कभी तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से यह क्यों नहीं पूछा कि झीरम मामले के जो 'सबूतÓ वे अपनी जेब में लेकर घूम रहे हैं कि, उन्हें जाँच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया? भूपेश सरकार ने पाँच साल तक केवल जाँच को अटकाने और सबूतों को छिपाने का काम किया ताकि शहीदों के परिजनों को कभी न्याय न मिल सके। अब अपने पापों का घड़ा भारतीय जनता पार्टी और वर्तमान राज्य सरकार पर फोड़कर कांग्रेसी नेता केवल रूदाली रूदन और स्यापा मचाने का नाटक कर रहे हैं। श्री पाण्डेय ने बैज को झीरम कांड के ठीक बाद का घटनाक्रम याद दिलाते हुए कहा कि बैज जानबूझकर उस सच से आँखें मूँद रहे हैं, जब झीरम काण्ड के तुरंत बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणदास महंत अस्पताल में एक कांग्रेसी नेता को डाँट रहे थे। आखिर उस डाँट के पीछे क्या रहस्य था? विडम्बना यह है कि, वही कांग्रेसी नेता भूपेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गया! कांग्रेसी नेताओं ने जिस बेहयाई और संवेदनहीनता के साथ झीरम काण्ड के शहीदों के घावों को कुरेदने का काम किया है, उसकी राजनीति में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती। बैज आज बयानबाज़ी करके शहीदों के उन नासूर बन चुके ज़ख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
पाण्डेय ने कहा कि नक्सलियों के साथ भाईचारा निभाने वाली कांग्रेस को इस बात पर शर्म आनी चाहिए कि उसके दशकों के कुशासन में बस्तर के गाँवों में कभी हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा तक नहीं लहराया जा सका। नक्सलियों की गीदड़ भभकियों के आगे मिमियाने वाली भूपेश बघेल सरकार का कायराना राजनीतिक चरित्र उस वक्त बेनकाब हुआ था, जब वे नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों के शवों को बस्तर सम्भाग के भीतर उनके गृह ग्राम तक पहुँचाने में भी पूरी तरह नाकाम रहे थे। इससे अधिक शर्मनाक और कायरतापूर्ण राजनीति किसी सरकार की नहीं हो सकती। श्री पाण्डेय ने तंज कसते हुए पूछा कि जब भूपेश सरकार के दौरान शहीदों के अपमान का यह शर्मनाक इतिहास लिखा जा रहा था, तब बैज का मुँह क्यों बंद था? उनकी यह कथित मुखरता और संवेदनाएँ उस समय वेंटिलेटर पर क्यों पड़ी थीं? कांग्रेस और बैज को चाहिए कि वे अपनी पूर्ववर्ती सरकार के इस काले इतिहास को याद रखें और शहीदों की शहादत पर घृणित राजनीति बंद करें।
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