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00 नि:शुल्क फिजियोथेरेपी सेंटर बना उम्मीद की नई किरण
रायपुर। आधुनिक फिजियोथेरेपी केंद्र गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और बुजुर्गों के लिए आशा की किरण बन रहे हैं। ये केंद्र उन्नत तकनीकों, व्यक्तिगत व्यायाम और विशेषज्ञ देखभाल के माध्यम से गतिशीलता, दर्द में कमी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में निरंतर संवेदनशील और प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी अभियान ने एक मासूम बच्ची के जीवन को नई दिशा दी और उसे आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास तथा सफलता की नई उड़ान प्रदान की।
प्राथमिक शाला डुमरिया की छात्रा कु. महेश्वरी आज जिले के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। एक समय ऐसा था जब वह ठीक से चल भी नहीं पाती थीं। उनके दाहिने पैर की मांसपेशियाँ अत्यंत कमजोर थीं, जिसके कारण दौडऩा तो दूर, सामान्य दैनिक कार्य करना भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। परिवार और विद्यालय दोनों के लिए यह चिंता का विषय था कि आखिर महेश्वरी का भविष्य कैसे संवरेगा। लेकिन समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित नि:शुल्क फिजियोथेरेपी सुविधा ने उनके जीवन में आशा की नई रोशनी जगा दी। संसाधन कक्ष गौरेला में उन्हें नियमित रूप से फिजियोथेरेपी उपचार उपलब्ध कराया गया। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्राची आर. पीटर्स ने पूरी निष्ठा, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ प्रतिदिन उनका उपचार किया। लगातार एक वर्ष तक चले इस समर्पित प्रयास और महेश्वरी की अटूट इच्छाशक्ति ने चमत्कारी परिणाम दिए।
आज महेश्वरी न केवल आत्मविश्वास के साथ चलने और दौडऩे में सक्षम हैं, बल्कि शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं। सत्र 2025-26 की प्राथमिक शाला परिचय परीक्षा में उन्होंने 91 प्रतिशत अंक अर्जित कर अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह सफलता उनके संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल है। महेश्वरी ने खेल के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विश्व विकलांग दिवस के अवसर पर आयोजित 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त कर सभी को गौरवान्वित किया। उनकी इस उपलब्धि पर जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किए जाने से उनका आत्मविश्वास और अधिक मजबूत हुआ। महेश्वरी की सफलता के पीछे जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी, संतोष सोनी, अजय जोशी, प्रवीण चौधरी तथा स्पेशल एजुकेटर राजेन्द्र साहू का सतत मार्गदर्शन और प्रोत्साहन भी महत्वपूर्ण रहा। सभी के संयुक्त प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि यदि सही समय पर सहयोग, उपचार और प्रेरणा मिले, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
महेश्वरी की कहानी केवल एक बच्ची की सफलता नहीं, बल्कि समग्र शिक्षा अभियान की संवेदनशील पहल, नि:शुल्क फिजियोथेरेपी सेवाओं की प्रभावशीलता और समाज के सामूहिक सहयोग की प्रेरणादायक मिसाल है। यह कहानी उन हजारों बच्चों और अभिभावकों के लिए उम्मीद का संदेश है, जो कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं।
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