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जिले के 990 विद्यालयों के शिक्षकों का बहुभाषी शिक्षा प्रशिक्षण संपन्न

13 Sep 2026   17 Views

जिले के 990 विद्यालयों के शिक्षकों का बहुभाषी शिक्षा प्रशिक्षण संपन्न

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जगदलपुर। बस्तर जिले के 1524 विद्यालयों में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर, समग्र शिक्षा रायपुर, लैंग्वेज ऐंड लर्निंग फाउंडेशन और टाटा ट्रस्ट के संयुक्त सहयोग से नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है 7 नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बस्तर जिले के 990 विद्यालयों के शिक्षकों का छह दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण विभिन्न बैचों में सम्पन्न हुआ। जिले में 49 विभिन्न बैच के माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण में बाल वाटिका तथा कक्षा 1 से 3 में भाषा एवं गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों ने सहभागिता निभाई। बस्तर के इन विद्यालयों में हल्बी, भतरी और गोंडी भाषी पृष्ठभूमि के बच्चे अध्ययनरत हैं। प्रशिक्षण में बच्चों की घर की भाषा को सीखने का आधार बनाने, बस्तर की भाषायी एवं सांस्कृतिक विविधता को कक्षा से जोडऩे तथा दूसरी भाषा सीखने के लिए परिचित भाषा को एक मजबूत सेतु के रूप में उपयोग करने पर चर्चा हुई।
प्रशिक्षकों और शिक्षकों ने मौखिक भाषा विकास, द्विभाषी शिक्षा, चार खंडीय मॉडल, बुनियादी गणित, कहानी-कविता, चित्र, टीपीआर, सामुदायिक ज्ञान, डिकोडिंग, अक्षर-मात्रा पहचान, ब्लेंडिंग, पठन एवं लेखन, गणना, संख्या ज्ञान, और गणितीय संक्रियाओं जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया। साथ ही बिगबुक, शिक्षक संदर्शिका, अभ्यास पुस्तिका, चित्र-चार्ट एवं अन्य शिक्षण-सामग्री के प्रभावी उपयोग तथा प्रिंट-समृद्ध वातावरण और सतत आकलन, नवीन पाठ्य पुस्तक कि समझ और बहुकक्षीय शिक्षण योजना पर भी चर्चा हुई। इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एन ई पी ) एसईएफ-एफएस व एससीएफ-एसई पर भी विस्तार से चर्चा किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने अपने कक्षा-कक्षीय अनुभव साझा किए और बच्चों की भाषा, संस्कृति, स्थानीय ज्ञान एवं अनुभवों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर जोर दिया। अब प्रशिक्षण के बाद इन रणनीतियों को विद्यालयों की वास्तविक कक्षाओं में नियमित रूप से लागू करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उक्त प्रशिक्षण कार्यशाला को सफल बनाने में मास्टर ट्रेनर रामकृष्ण ढाली, जोगेंद्र भारती, सत्यनारायण सिदार, रितु रजवाड़े, कौशिल्या शोरी, डुपेंद्र कश्यप, महेंद्र पांडे, छुड़ामणि कंवर, प्रदीप जोशी, रामकृष्ण साहू, डोमेन्द्र गंगबेर सहित एलएलएफ से सुदरू भारती, ईश्वर साहू, मदन कश्यप व विपिन पाणिग्राही का योगदान रहा।

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