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जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा - संत शंभूशरण

14 Aug 2026   14 Views

जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा - संत शंभूशरण

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00 दुख हमें अपने पिछले जन्मों के कर्मों के कारण होता है
रायपुर। दुनिया में सारा झमेला तो रुपयों का है, जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा, उसका भगवान के प्रति प्रेम कहां होगा। आज की दुनिया ऐसी है कि रुपयों से रिश्ता जोड़ते हैं लोग। जिंदगी तो भगवान ने दी है लेकिन एक दिन सबको छोड़कर जाना पड़ेगा। राग रखना है तो भगवान से रखो, रुपयों से नहीं। जो जीते जी अपने आनंद को मार दे उसे मौत क्या खाक मारेगा? भगवान का नाम सुमिरन करो,सारे पाप कट जायेंगे। 

जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा - संत शंभूशरण

मैक कॉलेज ऑडिटोरियम की श्रीराम कथा सत्संग में आज संत शंभूशरण लाटा महाराज ने अयोध्या से भगवान राम के वनगमन प्रस्थान की बड़ी ही मार्मिक व्याख्या की। प्रेम देखनी हो तो मानस में बताया गया है श्रीराम के प्रति सीता व लक्ष्मण का प्रेम देखें। वनवास का आदेश तो केवल श्रीराम को हुआ था लेकिन जब इन दोनों को अयोध्या में रहकर माता पिता व राज्यवासियों की सेवा करने की बात कही तो उन्होने केवल यह कहा कि बिना प्राण के शरीर से सेवा कैसे होगी। शास्त्रों की बातें हैं प्रेम को शब्दों से बांधा नहीं जा सकता, प्रेम में समर्पण होता है जिसे आंखों में ही देखकर माता पिता गुरु समझ लेते हैं कि भक्त के मन में क्या है? उन्होने प्रसंगवश ये भी बताया आज तो सेवा व भजन भी अपनी मर्जी से नहीं होती है। 

जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा - संत शंभूशरण

जिन्होने दिल रुपये पैसों को दे रखा है उसके बारे में क्या कहना? जिनके पास ज्यादा होगा वह ज्यादा और जिनके पास कम होगा वह कम रोयेगा। लेकिन जिनके पास है ही नहीं वह क्या रोयेगा। ऐसे लोगों का राग केवल भगवान के प्रति होता है। ये रुपया ही सारा झमेला है। प्रेम,भक्ति व सेवा की बात है तो माता सुमित्रा ने लक्ष्मण से कहा कि वन में केवल इतना करना कि राग, द्वेष, ईष्र्या, अहंकार व क्रोध से दूर रहना। केवल और केवल अनुराग प्रभु के प्रति ही रखना। 

जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा - संत शंभूशरण

संत श्री लाटा महाराज ने बताया कि कोई किसी को सुखी दुखी क्या करेगा, हमें किसी के कारण से दुख नहीं होता है। दुख हमें अपने पिछले जन्मों के कर्मों के कारण होता है। हम दूसरे पर तो दोष लगाते हैं पर अपने कर्मों की बात नहीं करते। कष्ट आए तो कैसे सहना चाहिए यह भगवान राम ने अपने वन गमन के दौरान बताया है। जो शक्ति राम में हैं-महादेव में है वही शक्ति भगवान के नाम में हैं। कभी भी यात्रा पर जाओ तो अपने ईष्ट देव का नाम लेकर जाओ उन्हे बताकर जाओ तो आने वाले संभावित बाधा दूर हो जायेंगे। कलयुग में यदि कुछ हैं तो वह है भगवान का नाम। सत्य ही धर्म है वेद पुराणों में बताया गया है।

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