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भिलाई। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएनएच एंड आरसी), दुर्ग ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ब्रेस्टफीडिंग फ्रेंडली हॉस्पिटल की प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त की है। यह मान्यता ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया (बीपीएनआई) तथा एसोसिएशन ऑफ हेल्थ प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) द्वारा प्रदान की गई है।
यह मान्यता 5 जून 2026 से 4 जून 2029 तक प्रभावी रहेगी तथा अस्पताल द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के सफल स्तनपान के दस चरण (टेन स्टेप्स टू सक्सेसफुल ब्रेस्टफीडिंग) तथा भारत सरकार के माँ कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रमाणित करती है। इस उपलब्धि के साथ जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय देश के उन चुनिंदा स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल हो गया है, जो माताओं एवं नवजात शिशुओं को स्तनपान आधारित सर्वोत्तम देखभाल उपलब्ध कराने के उच्चतम मानकों का पालन करते हैं। यह मान्यता जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान की शुरुआत, माँ एवं शिशु के बीच त्वचा से त्वचा संपर्क (स्किन टू स्किन कोन्टैक्ट), रूमिंग-इन व्यवस्था, स्तनपान संबंधी विशेषज्ञ परामर्श तथा माताओं को व्यावसायिक प्रभावों से मुक्त सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाओं के सफल क्रियान्वयन का प्रमाण है।
यह सम्मान बीपीएनआई के केंद्रीय समन्वयक डॉ. अरुण गुप्ता तथा एएचपीआई के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी द्वारा प्रदान किया गया। इस प्रक्रिया में यूनिसेफ, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स तथा आईबीफैन (आईबीएफएएन) सहित विभिन्न संस्थाओं का सहयोग प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि के पीछे मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. कौशलेन्द्र ठाकुर तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय कुमार के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनके निर्देशन में अस्पताल में स्तनपान अनुकूल सेवाओं के संस्थागत विकास एवं क्रियान्वयन को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया गया।
बाल रोग विभाग की अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सम्बिता पांडा तथा नवजात शिशु विभाग प्रभारी अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुबोध साहा ने नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं में स्तनपान संबंधी मानकों के सफल समावेशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं वरिष्ठ सलाहकार एवं बीएफएचआई समन्वयक डॉ. माला चौधरी ने विभिन्न विभागों के समन्वय, प्रशिक्षण तथा मूल्यांकन प्रक्रियाओं का प्रभावी नेतृत्व करते हुए मान्यता प्राप्ति की पूरी प्रक्रिया का सफल संचालन किया।
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