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रायपुर। कान्यकुब्ज समाज में बिरादरी से जुड़े रहे उन लोगों को जन्मतिथि और पुण्यतिथि के मौके पर याद जरूर किया जाता है जिनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता और जो समाज के बाहर में अपने कार्यों के लिए लोकप्रिय रहे हैं.ताकि आने वाले पीढ़ी के लिए वे प्रेरणादायक बने रहें। इस कड़ी में रविवार 2 अगस्त को कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल, आशीर्वाद भवन द्वारा अभिभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ के गौरव, कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष पंडित रविशंकर शुक्ल तथा उनके पुत्र, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल की जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। बता दें कक्का जी के नाम से पंडित रविशंकर का और विद्या भैया के नाम से विद्याचरण का संबोधन आज भी चिर परिचित है।
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों एवं पदाधिकारियों ने दोनों महान विभूतियों की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में आयुष विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रोफेसर के एल तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने दोनों विभूतियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि पंडित रविशंकर शुक्ल ने शिक्षा, समाजसेवा और जनकल्याण को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वहीं श्री विद्या चरण शुक्ल ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
कार्यक्रम में कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री सुरेश मिश्रा, सचिव श्री राजकुमार दीक्षित, उपाध्यक्ष श्री संजय अवस्थी, सहसचिव श्री प्रमोद मिश्रा सहित कार्यकारिणी सदस्य श्री आशीष बाजपेई, श्री विजय शुक्ला, श्री विकास तिवारी, श्री इंद्र तिवारी, श्री गिरजाशंकर दीक्षित, श्री जयशंकर तिवारी, श्री अशोक दीक्षित, श्री श्रीकांत अवस्थी, श्री चंद्रिका बाजपेई, श्री आर.के. दीक्षित, श्री जे.पी. मिश्रा, श्री आर.के. मिश्रा, श्री के.एल. दीक्षित, श्री दुर्गेश अग्निहोत्री, श्री गोपाल मिश्रा, श्री रविंद्र मिश्रा, श्री 1द्बस्रशह्यद्ध द्विवेदी एवं अन्य समाजजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि पंडित रविशंकर शुक्ल न केवल अभिभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री थे, बल्कि कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष के रूप में उन्होंने समाज को संगठित करने, शिक्षा के प्रसार तथा सामाजिक उत्थान के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व के कारण शिक्षा मंडल आज भी समाज सेवा, शिक्षा एवं संस्कारों के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रनिर्माण एवं समाजोत्थान के उनके आदर्शों पर चलने के संकल्प के साथ किया गया।
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