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00 पहली बार कागजरहित और पूर्ण डिजिटल माध्यम से संकलित हो रहा है राष्ट्रीय डेटा
00 हेल्पलाइन 1855 के जरिए नागरिकों को मिल रही है तकनीकी सहायता
रायपुर। छत्तीसगढ़ मे शुरू हुई भारत की जनगणना 2027’ के प्रथम चरण का आगाज़ बहुत सुगम हुआ। राज्य में शुरू हुई इस पूर्णतः डिजिटल जनगणना को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in/ के सक्रिय होते ही प्रदेश भर से पंजीकरण का सिलसिला शुरू हो गया है। जनगणना संचालन निदेशालय, छत्तीसगढ़ के द्वारा मिले आंकड़ों के अनुसार, लगभग 13,400 व्यक्तियों ने पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है, जिनमें से 9,002 नागरिक अपनी स्व-गणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके हैं। भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य आगामी दशक के लिए सटीक सामाजिक-आर्थिक नीतियों हेतु एक विश्वसनीय डिजिटल डेटा आधार तैयार करना है। इस चरण में ‘स्व-गणना’ के विकल्प ने नागरिकों को सशक्त बनाया है, जिससे वे बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपने परिवार का विवरण स्वयं दर्ज कर पा रहे हैं।
डिजिटल जनगणना की इस प्रक्रिया को अत्यंत सरल और सुरक्षित बनाया गया है। नागरिकों को पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ‘वन टाइम पासवर्ड’ (OTP) आधारित प्रमाणीकरण करना होता है। इसके उपरांत, परिवार के मुखिया द्वारा आवास की स्थिति, पेयजल के स्रोत, ऊर्जा के साधन और परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत विवरण जैसे—नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा और व्यवसाय की जानकारी दर्ज की जा रही है। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नागरिकों को एक डिजिटल संदर्भ संख्या (Census Reference Number – CRN) प्राप्त हो रही है। यह संख्या भविष्य में सत्यापन के समय प्रगणकों (Enumerators) को दिखानी होगी, जिससे डेटा मिलान का कार्य त्वरित और त्रुटिहीन होगा।
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों और 19,978 ग्रामों में इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने 62,500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विशाल टीम तैनात की है। इसमें 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं, जो डिजिटल उपकरणों के माध्यम से डेटा सत्यापन का कार्य कर रहे हैं। तकनीकी सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन संख्या 1855 भी सक्रिय है, जो नागरिकों के संशयों का निराकरण कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान संकलित किया गया समस्त व्यक्तिगत डेटा जनगणना अधिनियम, 1948 के कड़े प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय है। इस जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा। इसे किसी भी कानूनी जांच या कर निर्धारण के लिए साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। केंद्र एवं राज्य सरकारों ने प्रदेशवासियों से इस डिजिटल पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। पहले दिन प्राप्त उत्साहजनक आंकड़े इस बात का प्रतीक हैं कि छत्तीसगढ़ के नागरिक राष्ट्र निर्माण की इस डिजिटल प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तत्पर हैं।
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