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0-सिलीगुड़ी में एसएसबी फ्रंटियर हेडक्वार्टर में एसएसबी के कई प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी
सिलीगुड़ी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी में एसएसबी परियोजनाओं की आधारशिला रखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तारीफ़ की, जिन्होंने 45 दिनों में बीएसएफ और एसएसबी को 1129 एकड़ ज़मीन आवंटित की। केंद्रीय मंत्री ने पिछली ममता बनर्जी सरकार पर सीमा सुरक्षा बलों को ज़मीन देने में अनावश्यक देरी करने का आरोप लगाया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण था। यह कदम सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा और घुसपैठ रोकने में तेज़ी लाने का प्रतीक है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में एसएसबी फ्रंटियर हेडक्वार्टर में एसएसबी के कई प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी। साथ ही, उन्होंने बॉर्डर फोर्स को ज़मीन देने में देरी के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना भी की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछली राज्य सरकार से बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के लिए ज़मीन देने का कई बार अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि हमने ममता बनर्जी से बीएसएफ को ज़मीन देने की लगातार अपील की, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान ऐसा नहीं किया गया। मैंने एक बार उनके ऑफिस जाकर उन्हें यह भी समझाया था कि यह ज़मीन बीएसएफ के लिए है, न कि बीजेपी के लिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पद संभालने के 45 दिनों के अंदर बीएसएफ और एसएसबी को 1,129 एकड़ ज़मीन तेज़ी से देने का श्रेय दिया। शाह ने आगे कहा कि काम में यह तेज़ी इसलिए नहीं है कि वह बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं। वह समझते हैं कि जब तक घुसपैठ नहीं रुकेगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत सुरक्षित है। शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रणनीतिक महत्व पर ज़ोर दिया और खुली सीमाओं की सुरक्षा करने के लिए स्स्क्च जवानों की तारीफ़ की।
उन्होंने कहा कि मैं हमेशा कहता हूँ कि सबसे मुश्किल काम बीएसएफ जवानों का होता है जो खुली सीमा की सुरक्षा करते हैं। पीएम मोदी की सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से सिलीगुड़ी कॉरिडोर के महत्व को समझा है। यह एक संवेदनशील कॉरिडोर है जो 8 राज्यों को जोड़ता है, और यहाँ नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ मिलती हैं। हमने चोपड़ा, किशनगंज और धुबरी में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।
केंद्रीय मंत्री ने सीमा सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। लगभग 60 किलोमीटर लंबा और 22 किलोमीटर चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। चिकन नेक के नाम से जाना जाने वाला यह संकरा रास्ता अपनी स्थिति के कारण बड़ी चुनौतियां पेश करता है; यह दक्षिण और पश्चिम में बांग्लादेश, उत्तर में तिब्बत (चीन) के बीच स्थित है और नेपाल, बांग्लादेश व भूटान के करीब है।
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