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नारायणपुर। कृषि आदानों (खाद और बीज) की समय पर उपलब्धता किसानों की राह बेहद आसान बनाती है। इससे न केवल उत्पादकता में वृद्धि होती है, बल्कि कृषि लागत और मेहनत भी कम होती है। छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों और जिला प्रशासन की मुस्तैदी का सीधा असर अब प्रदेश के खेतों में दिखने लगा है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान के कटोरे में अन्नदाताओं के चेहरों पर मुस्कान तैरने लगी है। इसकी एक बानगी नारायणपुर जिले के ग्राम दंडवन में देखने को मिली है, जहाँ समय पर कृषि आदानों (खाद-बीज) की उपलब्धता ने किसानों की राह बेहद आसान कर दी है।
सही समय पर मिला संबल, तैयारियों में आई तेजी
ग्राम दंडवन के प्रगतिशील किसान रुद्रेश्वर चौहान के पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है, जहाँ वे हर साल पारंपरिक और वैज्ञानिक पद्धतियों के समन्वय से धान और अन्य खरीफ फसलों की खेती करते हैं। इस साल मानसून की दस्तक के साथ ही रुद्रेश्वर को उनकी जरूरत के मुताबिक उन्नत बीज और पर्याप्त मात्रा में खाद समय पर उपलब्ध करा दी गई है। समय पर मिले इस सहयोग से उत्साहित रुद्रेश्वर अब पूरी ऊर्जा के साथ अपने खेतों को संवारने और बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं।
पिछले रिकॉर्ड से बढ़ा हौसला: 85 क्विंटल धान का किया था विक्रय
रुद्रेश्वर चौहान केवल एक सामान्य किसान नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में मैंने सही कृषि प्रबंधन और कड़ी मेहनत के दम पर 85 क्विंटल धान का रिकॉर्ड उत्पादन किया था। जब इस उपज को बेहतर व्यवस्था के बीच विक्रय किया, तो उससे मिली अच्छी आय ने मेरे पूरे परिवार की तकदीर बदल दी और खेती के प्रति मेरा उत्साह दोगुना हो गया। रुद्रेश्वर का मानना है कि इस बार समय पर खाद-बीज मिल जाने से बुवाई का कार्य बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से पूरा होगा, जिससे इस वर्ष उत्पादन के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। उन्होंने इस सुदृढ़ व्यवस्था के लिए शासन और जिला प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त किया है।
कम लागत, अधिक मुनाफा
छत्तीसगढ़ शासन का कृषि विभाग इस बार एक बेहद आक्रामक और सकारात्मक रणनीति के साथ धरातल पर काम कर रहा है। विभाग का मुख्य फोकस किसानों को उच्च गुणवत्तायुक्त बीज वितरित करने पर है, ताकि फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और पैदावार अच्छी हो। इसके साथ ही, खाद की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि वक्त पर किसानों को सोसायटियों के चक्कर न काटना पड़ें। वहीं दूसरी ओर, आधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण के जरिए किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी इनपुट कॉस्ट (लागत) कम हो सके और नेट प्रॉफिट (शुद्ध लाभ) में बढ़ोतरी हो।
शासन के इन प्रयासों से आज ग्राम दंडवन सहित पूरे अंचल के किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। रुद्रेश्वर चौहान की यह कहानी महज एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के बदलते परिदृश्य की है। समय पर खाद और बीज की निर्बाध आपूर्ति होने से खेतों में हल चल चुके हैं और बीज डालने की तैयारियां जोरों पर हैं। छत्तीसगढ़ का अन्नदाता एक बार फिर देश का अन्न भंडार भरने के लिए, एक सुनहरे और समृद्ध भविष्य की उम्मीद के साथ अपने खेतों में उतर चुका है।
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