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00 टोकन सिस्टम से किसानों को मिलेगा समय पर खाद, कालाबाजारी पर लगेगी रोक
बीजापुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए बीजापुर जिले में नई डिजिटल खाद वितरण व्यवस्था शुरू की गई है। भारत सरकार के उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय की फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस) योजना के तहत बीजापुर को पायलट जिले के रूप में चुना गया है। यह नई व्यवस्था 7 जुलाई 2026 से लागू हो गई है।
मोबाइल ऐप से होगी खाद की बुकिंग
नई व्यवस्था के तहत किसान अपने मोबाइल फोन से फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस) ऐप के माध्यम से निकटतम उर्वरक विक्रय केंद्र पर खाद की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद उन्हें एक क्यूआर कोड आधारित टोकन मिलेगा, जिसके आधार पर निर्धारित समय पर खाद प्राप्त किया जा सकेगा।
तीन दिन तक मान्य रहेगा टोकन
जारी किया गया टोकन तीन दिनों तक मान्य रहेगा। यदि किसान इस अवधि में खाद प्राप्त नहीं करते हैं, तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा। इससे जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।
दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के पहले चरण में किसान गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस ऐप डाउनलोड कर अपनी भूमि और फसल की जानकारी दर्ज करेंगे तथा निकटतम विक्रय केंद्र का चयन कर टोकन प्राप्त करेंगे। दूसरे चरण में किसान विक्रय केंद्र पर क्यूआर कोड आधारित टोकन प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद पीओएस मशीन में टोकन स्कैन कर बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा और किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
पारदर्शी और आसान होगी खाद वितरण व्यवस्था
जिला प्रशासन के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था से खाद वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। किसानों को समय पर खाद मिलेगी, अनावश्यक भीड़ कम होगी और उर्वरकों की कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
सहायता के लिए कृषि विभाग रहेगा उपलब्ध
यदि किसी किसान को ऐप का उपयोग करने या टोकन प्राप्त करने में कोई कठिनाई होती है, तो वे अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, लैम्प्स अथवा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों की सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
डिजिटल टोकन आधारित खाद वितरण व्यवस्था किसानों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे खेती के लिए आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होंगे और कृषि कार्यों में तेजी आएगी।
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