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00 जीवन के अंतिम समय में भी राम नाम निकलना है मुश्किल
रायपुर। श्रीराम कथा केवल कथा ही नहीं है हर प्रसंग में जीवन दर्शन को समझाया है भगवान ने,ये तो हमारे आपके समझने की बात है कि कितना जीवन में, आचरण-व्यवहार में उतार सकते हैं। किसी को जानने से ज्यादा असर सुनने का होता है। इसलिए कथा सुने,मन में भाव आता है। लेकिन इंसान का मै नहीं छूटता है, यही सबसे बड़ी बुराई है। भगवान को वह याद तब करता है जब सब कुछ छूट जाता है, लेकिन ये भी व्यथा है कि जीवन के अंतिम समय में भी राम नाम निकलना मुश्किल होता है। क्रोध आए तो कल पर टाल दें,अपराध नहीं होगा। रविवार को कथा सुबह व शाम दो सत्रों में हुई।
मैक कॉलेज ऑडिटोरियम में रविवार को संत शंभूशरण लाटा महराज ने श्रीराम कथा में बताया कि अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान कोई भी रास्ता निकाल लेते हैं और समदर्शी रहते हुए मारने वाले को भी मुक्ति प्रदान कर देते हैं। जैसे कि उन्होने सुग्रीव के भाई राजा बालि के साथ किया। इसी कड़ी में उन्होने आगे बताया कि सुग्रीव के प्रति भी उन्हे गुस्सा आ गया और उसे मारने की बात कह गए,लेकिन जब क्रोध है तब नहीं दूसरे दिन मारने की बात कहते हैं। वे यह बताना चाह रहे हैं कि यदि क्रोध आए तो कल पर टाल दें, कारण टल जायेगा। तब न अपराध होगा और न आत्महत्या जैसे पाप का बोध होगा। तब आपका राम कथा सुनना सफल हो जायेगा।
संत श्री ने जामवंत-हनुमान प्रसंग पर बताया कि बड़े बुजुर्गों के पास अनुभव और दूर दृष्टि होती है लेकिन कुछ कर पाने में वे असमर्थ पाते हैं क्योकि शरीर साथ नहीं देता है। जबकि युवाओं के पास जोश के साथ कुछ भी करने का जज्बा होता है,लेकिन अनुभव का अभाव होता है। यदि परिवार, समाज या व्यापार में दोनों मिलकर संचालन करें तो निश्चित रुप से सफल होंगे लेकिन आज कहां। आज बुजुर्गों का आदर करना छूट गया है उन्हे चुप करा दिया जाता है। किसी कार्य को करने से जब विशेष हर्ष हो तो वह कार्य अवश्य सफल होता है। कीर्ति जब बढ़ जाए तो भजन भी बढ़ाना चाहिए नहीं तो वही कीर्ति खा जाती है। राक्षसनी को मारने के लिए हनुमान जी ने अति सूक्ष्म रुप धारण कर लिया। लेकिन आज यदि लोग बड़े हो गए तो छोटा होना पसंद नहीं करते। इसलिए कोई भी कार्य करने से पहले विचार जरूर कर लेना चाहिए नहीं तो वही बेचारी हो जाते हैं।
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15 Aug 2026 32 Views