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कोंडागांव। जिले के बंधा पारा बड़े कनेरा रोड स्थित झाड़ा सिरहा मुरिया चौक पर 150वां मुरिया विद्रोह स्मृति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अमर शहीद झाड़ा सिरहा और उनके नेतृत्व में बलिदान देने वाले हजारों गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
वक्ताओं ने बताया कि लगभग 150 वर्ष पूर्व बस्तर अंचल के वीरों ने विदेशी आक्रमणकारियों के बढ़ते प्रभाव के विरुद्ध विद्रोह किया था। यह विद्रोह जल, जंगल, जमीन, कला, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए किया गया था। यह आंदोलन केवल एक संघर्ष नहीं था, बल्कि स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा का प्रतीक था। झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में शुरू हुआ यह विद्रोह आगे चलकर 'मुरिया दरबारÓ के रूप में विकसित हुआ। मुरिया दरबार ने आदिम लोकतंत्र की एक सशक्त मिसाल पेश की। इसने समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर एकजुट किया और बस्तर के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने और आने वाली पीढिय़ों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शहीदों को याद किया गया।
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