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रायपुर। समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य के विद्यालयीन शिक्षकों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट शिक्षक क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 12 से 16 अक्टूबर तक सेमिनार हाल, कृषि महाविद्यालय, रायपुर में किया गया। यह कार्यक्रम पंडित सुंदर लाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की घटक इकाई, के तत्वावधान में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित हुआ। इसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूली शिक्षा 2023 के अनुरूप विद्यालयों में कौशल आधारित, व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं का विकास करना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर जानकारी एवं व्यावहारिक अनुभव प्रदान किए गए। 12 से 16 अक्टूबर तक आयोजित प्रशिक्षण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, संरक्षित खेती, सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, बीज उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, मृदा परीक्षण, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, पुष्प उत्पादन तथा कटाई उपरांत प्रबंधन पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने प्रतिभागी शिक्षकों को प्रमाण-पत्र वितरित किया।
समापन अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कौशल आधारित शिक्षा के महत्व एवं वर्तमान समय में इसकी बढ़ती आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक दक्षता, आत्मनिर्भरता तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोडऩे में भी महत्व पूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान, तकनीकी कौशल एवं अनुभवों का प्रभावी उपयोग अपने विद्यालयों में करें तथा विद्यार्थियों को कृषि की नवीनतम तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों से परिचित कराएं। उन्होंने कृषि शिक्षा को नवाचार, उद्यमिता एवं स्थानीय आवश्यकताओं से जोडऩे पर विशेष बलदिया। उन्होंने कहाकि गुणवत्तापूर्ण कौशल शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण युवाओंको आत्मनिर्भर बनाकर कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन में सभी के योगदान, सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग की सराहना की। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव का उपयोग शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने में करेंगे।
समापन अवसर पर कृषि महाविद्यालय, रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे द्वारा प्रतिभागियों के साथ विचार एवं अनुभव साझा किया गया। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का उपयोग शिक्षक अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक, कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने में करेंगे। यह पहल विद्यालयीन शिक्षा को कृषि, व्यावसायिक कौशल एवं उद्यमिता से जोडऩे की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. रामा मोहन सावु द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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