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कार्डियक अरेस्ट के बाद 15 प्रतिशत ईएफवाले 73 वर्षीय मरीज का सफल इलाज

07 Oct 2026   11 Views

कार्डियक अरेस्ट के बाद 15 प्रतिशत ईएफवाले 73 वर्षीय मरीज का सफल इलाज

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00 मेकाहारा के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी उपलब्धि
00 तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज के साथ गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस का किया गया जटिल ऑपरेशन
रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक बार फिर से अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण कार्डियक सर्जरी में सफलता हासिल की है। विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने 73 वर्षीय मरीज, जिसे कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में अस्पताल लाया गया था, का सफलतापूर्वक कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग एवं एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट कर उसे नया दिया।
मरीज को गंभीर अवस्था में अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया था। उस समय उसकी हृदय गति रुक चुकी थी। आपातकालीन विभाग की टीम ने तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एवं डीसी शॉक और डिफिब्रिलेशन - चिकित्सा जगत में हृदय की असामान्य और जानलेवा धड़कनों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं ) देकर मरीज को पुनर्जीवित किया। हृदय की धड़कन वापस आने के बाद मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया।
हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 15 प्रतिशत रह गई थी
कार्डियक अरेस्ट से सफलतापूर्वक रिवाइव होने के बाद भी मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी। जांच में उसकी हृदय की पंपिंग क्षमता केवल लगभग 15 प्रतिशत पाई गई। इसके साथ ही मरीज की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज था तथा एओर्टिक वाल्व में गंभीर सिकुडऩ पाई गई। मरीज को कुछ दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट एवं गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया। स्थिति में सुधार होने पर वेंटिलेटर हटाया गया और इसके बाद उसे कार्डियक सर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया गया। ऑपरेशन से पहले मरीज को लगभग 23 दिनों तक कार्डियक सर्जरी आईसीयू में रखकर उसकी स्थिति को स्थिर करने का प्रयास किया गया। इस दौरान मरीज को एक्यूट किडनी इंजरी (किडनी फेल्योर) की समस्या भी हुई और कुछ समय के लिए पेशाब का आना बंद हो गया था। स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए प्रारंभिक अवस्था में मरीज ऑपरेशन के लिए उपयुक्त नहीं था। धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसे ऑपरेशन के लिए तैयार किया।
मरीज की उम्र, हाल ही में हुए कार्डियक अरेस्ट के बाद बेहद कम हृदय की पंपिंग क्षमता, तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज तथा गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस को देखते हुए ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण था। मरीज के परिजनों को उसकी गंभीर स्थिति तथा ऑपरेशन से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यहाँ तक की मरीज का ऑपरेशन थिएटर से निकल पाना मुश्किल है,इसके बावजूद परिजनों ने ऑपरेशन के लिए सहमति दी।
सीटीवीएस विभागाध्यक्ष एवं मुख्य सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए उसका कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्टिंग किया गया। हृदय की बंद कोरोनरी धमनियों में वेन एवं आर्टरी कंड्यूट का उपयोग करते हुए बाईपास बनाया गया। इसके बाद गंभीर रूप से संकुचित एओर्टिक वाल्व को हटाकर टाइटेनियम से निर्मित बायलीफलेट मैकेनिकल एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपित किया गया। उन्होंने बताया कि इस मरीज की सर्जरी कई कारणों से बेहद चुनौतीपूर्ण थी। मरीज की उम्र 73 वर्ष थी, हाल ही में कार्डियक अरेस्ट हो चुका था,सीपीआर के बाद हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 15-20 प्रतिशत के आसपास थी, तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज था और साथ ही गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस भी था। ऐसी स्थिति में एक साथ सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट) और महाधमनी वाल्व प्रतिस्थापन करना अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। वर्तमान में मरीज चिकित्सकीय रूप से स्थिर है और अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है। यह उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया।

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