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रायपुर। छत्तीसगढ़ सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक पीठों में से एक ज्योतिष्पीठ (बद्रिकाश्रम) के शंकराचार्य, परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तरामनाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज 1008 इस वर्ष संवत् 2083 विक्रमी आषाढ़ पूर्णिमा (गुरुपूर्णिमा) 29 जुलाई से भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर तक का चातुर्मास्य अनुष्ठान विश्व के सबसे बड़े निर्माणाधीन सवा लाख शिवलिंग मंदिर सपाद लक्षेश्वर धाम ग्राम सलधा बेमेतरा में संपन्न करेंगे। शंकराचार्य के आगमन से प्रदेश के संत समाज और श्रद्धालुओं में उत्साह है। चातुर्मास प्रवास के दौरान प्रतिदिन वेद-पुराण प्रवचन, धर्मसभा, श्रद्धालुओं के लिए आशीर्वचन, गौसंरक्षण पर चर्चा और समाज व राष्ट्र से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। आयोजन में देशभर से संत, विद्वान और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
दंडी स्वामी इन्दुभवानंद तीर्थ ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि शंकराचार्य का छत्तीसगढ़ आगमन प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। उनके अनुसार यह चातुर्मास अनुष्ठान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा तथा समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा। आयोजन समिति के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों और गांवों में लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारे सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। समिति ने धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर धर्मोपदेश का लाभ लेने की अपील की है।
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