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रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के डॉक्टरों ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति का कटा हुआ हाथ सफलतापूर्वक जोड़कर चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मरीज का बायां हाथ धान की भूसी (पैडी हस्क) मशीन के चलते बेल्ट में फंस जाने से कोहनी के नीचे से कट गया था।
घटना के लगभग दो घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल लाया गया। कटा हुआ हाथ सही तरीके से बर्फ वाले डिब्बे में सुरक्षित रखा गया था, जिससे सर्जरी सफल होने की संभावना बढ़ गई। प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज को तुरंत ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। लगभग 8 घंटे चली इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ.जितेन्द्र कुमार मिश्र (प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष) ने किया। चोट गंभीर होने के कारण सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। ऑर्थोपेडिक टीम, जिसका नेतृत्व डॉ. संदीप नेमा ने किया, ने हड्डी को छोटा कर उसे ठीक से जोड़ा। एनेस्थीसिया टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा।
प्लास्टिक सर्जरी टीम के अन्य सदस्यों ने मिलकर हाथ में दोबारा रक्त प्रवाह शुरू किया और उसे सुरक्षित रूप से जोडऩे में सफलता पाई। मरीज को बाद में दो और सर्जरी से गुजरना पड़ा और लगातार निगरानी में रखा गया। एक महीने बाद, मरीज का हाथ ठीक तरह से रक्त प्रवाह के साथ काम कर रहा है और घाव लगभग भर चुका है। हड्डी को पूरी तरह जुडऩे में लगभग 2 महीने और लग सकते हैं, जबकि हाथ की पूरी कार्यक्षमता लौटने में अधिक समय लग सकता है। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसी स्थिति में मरीज और कटा हुआ अंग 6 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचना और अंग को बर्फ में सही तरीके से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी आपात स्थितियों में टीमवर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
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