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00 महिला आयोग की जनसुनवाई में 17 प्रकरणों की सुनवाई, 5 प्रकरण नस्तीबद्ध
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में आज रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में प्रदेश स्तर की द्वितीय जनसुनवाई आयोजित हुई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू एवं सदस्य सुश्री दीपिका शोरी ने महिला उत्पीडऩ से संबंधित 30 प्रकरणों की सुनवाई के लिए रखा, जिनमें 17 प्रकरणों की सुनवाई की गई तथा 5 प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए।
जनसुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत की कि अनावेदकगण एआई के माध्यम से उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर उसकी सामाजिक छवि खराब कर रहे हैं। आयोग ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर साइबर अपराध का मामला माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि आवेदिका संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र है। अनावेदकगण द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगे जाने पर प्रकरण आगामी सुनवाई के लिए रखा गया। एक अन्य मामले में आवेदिकाओं ने पिछली सुनवाई के दौरान बिना उनकी बात सुने प्रकरण नस्तीबद्ध किए जाने की शिकायत आयोग के समक्ष रखी। आवेदिकाओं द्वारा सूचना के अधिकार के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई। आयोग ने शिकायत पर पुनर्विचार करते हुए मामले को आगामी कार्रवाई के लिए रखा।

पति-पत्नी के विवाद से जुड़े एक प्रकरण में आवेदिका ने शारीरिक प्रताडऩा, दुर्व्यवहार और धमकी की शिकायत की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच सुलह होने तथा साथ रहने की जानकारी मिलने पर आयोग ने प्रकरण को निगरानी में रखा। एक अन्य प्रकरण में पति द्वारा पत्नी की बहन के साथ रहने की बात स्वीकार किए जाने पर आयोग ने उसे पत्नी को पुलिस अभिरक्षा के साथ ससुराल ले जाने के निर्देश दिए और मामले को आगामी सुनवाई के लिए रखा। घर से निकाले जाने और पुश्तैनी संपत्ति से बेदखल किए जाने की शिकायत पर आयोग ने आवेदिका को विधिक सहायता के माध्यम से अधिवक्ता से परामर्श लेने की सलाह दी। वहीं, मां और बेटे-बहू के बीच पारिवारिक विवाद के एक मामले में दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आयोग ने आपसी मतभेद दूर कर शांतिपूर्वक रहने की समझाइश दी।
जनसुनवाई में आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली डिजिटल गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा तथा एआई तकनीक के दुरुपयोग के मामलों में पीडि़तों को विधिक कार्रवाई के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा।
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