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मुंबई। भारतीय राजनीति के पन्नों में महाराष्ट्र एक बार फिर बड़े सत्ता परिवर्तन और कूटनीतिक हलचल का गवाह बनने जा रहा है। पश्चिम बंगाल के सियासी घटनाक्रमों के बाद, अब पश्चिमी भारत के इस सबसे महत्वपूर्ण राज्य में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। राजनीतिक गलियारों में तैरती खबरों और बेहद पुख्ता सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के भीतर असंतोष का गुबार फूटने की कगार पर है। खबर है कि पार्टी के 7 मौजूदा लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का हाथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने का मन बना चुके हैं। यह संभावित टूट न केवल उद्धव ठाकरे के सांगठनिक ढांचे को हिलाकर रख देगी, बल्कि आगामी चुनावों से पहले उनके राजनीतिक कद के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि ये सातों सांसद आज ही देश की राजधानी दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से एक विशेष मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक के दौरान वे संसद के भीतर खुद को एक अलग और स्वतंत्र विधायी समूह के रूप में मान्यता देने का औपचारिक प्रस्ताव रखेंगे।
जो सात चेहरे इस समय महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं, वे अपने-अपने क्षेत्रों में गहरी पकड़ और बड़ा जनाधार रखते हैं। संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व),संजय जाधव (परभणी, मराठवाड़ा),राजाभाऊ प्रकाश वाजे (नासिक),भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिर्डी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम, विदर्भ)
,नागेश पाटिल अष्टिकर (हिंगोली)ओमराजे निंबालकर (धाराशिव) के नाम शामिल हैं।
महाराष्ट्र की यह मौजूदा स्थिति साल 2022 के उस घटनाक्रम की याद दिलाती है, जब एकनाथ शिंदे ने विधायकों की भारी संख्या के साथ बगावत कर महाविकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया था। यदि ये सात सांसद भी औपचारिक रूप से शिंदे गुट के साथ चले जाते हैं, तो संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास संख्या बल बेहद कम रह जाएगा। यह बदलाव आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह से पलट कर रख सकता है। (साभार प्रभासाक्षी)।
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