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00 छह महीने की खुफिया जाँच में रायपुर के दो नाबालिगों के संदिग्ध ऑनलाइन कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़ाव का खुलासा
00 आतंकवाद निरोधक खुफिया जाँच में उत्कृष्ट कार्य के लिए 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी को राष्ट्रीय सम्मान
00 प्रशिक्षण में उत्कृष्टता के लिए पहले भी मिला था पदक, जनवरी 2026 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित
रायपुर। रायपुर में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) की विचारधारा से प्रभावित संदिग्ध ऑनलाइन कट्टरपंथी मॉड्यूल का खुलासा करने वाली छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस अधिकारी राजश्री मिश्रा को खुफिया क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक (केजीडीपी)-2026 से सम्मानित करने के लिए चुना गया है। करीब छह महीने तक चली गोपनीय जाँच में दो नाबालिगों की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियाँ सामने आई थीं।
वर्ष 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी राजश्री मिश्रा वर्तमान में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की पुलिस अधीक्षक हैं। यह उनका दूसरा केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक है। इससे पहले उन्हें प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह सम्मान मिल चुका है। इस बार उनकी भूमिका आतंकवादी विचारधारा से प्रभावित संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की जाँच और खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण में महत्वपूर्ण रही। मिश्रा की निगरानी में एटीएस ने लगभग छह महीने तक तकनीकी निगरानी और मानवीय स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जाँच आगे बढ़ाई। डिजिटल गतिविधियों की कडिय़ाँ जोड़ते हुए टीम ने दो नाबालिगों की पहचान की, जिनके आईएसआईएस से प्रेरित प्रचार सामग्री के प्रसार से कथित जुड़ाव के संकेत मिले थे।
अधिकारियों के अनुसार, मामला संवेदनशील होने के कारण खुफिया सूचनाओं की गहन पड़ताल और डिजिटल साक्ष्यों का संकलन किया गया। इसके बाद एटीएस ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की। नाबालिगों से संबंधित कानूनी प्रक्रिया किशोर न्याय व्यवस्था के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अपनाई गई। निर्धारित समयसीमा के भीतर माना स्थित किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया। जाँच मुख्यत: ऑनलाइन कट्टरपंथी प्रभाव और चरमपंथी सामग्री के कथित प्रसार पर केंद्रित रही। दोनों नाबालिगों द्वारा किसी आतंकवादी हमले को अंजाम देने का दावा नहीं किया गया है।
राजश्री मिश्रा को मिला यह सम्मान डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली कट्टरपंथी विचारधारा की समय रहते पहचान और खुफिया सूचनाओं के आधार पर प्रभावी हस्तक्षेप के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही, ऐसे संवेदनशील मामलों में संदिग्ध ऑनलाइन व्यवहार और साक्ष्यों से स्थापित आपराधिक संलिप्तता के बीच अंतर सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी सामने आती है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी जाँच लागू कानूनी प्रावधानों और निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत पूरी की गई। राजश्री मिश्रा को इससे पहले प्रशिक्षण में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय सम्मान तथा जनवरी 2026 में सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिल चुका है।
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