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छत्तीसगढ़ में नवाचार, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर विकसित कर रहा आईआईटी भिलाई
संस्थान में 191 अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित, अनुसंधान एवं विकास बजट बढ़कर हुआ 187 करोड़ रुपए
युवा अपने ज्ञान और कौशल से विकसित भारत के निर्माण में दें योगदान रू डॉ. विजय कुमार सारस्वत
रायपुर--



भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के नालंदा हॉल में आज छठा दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के कुल 313 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए प्रतिभावान विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं सीनेट पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के पूर्व सदस्य एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक डॉ. विजय कुमार सारस्वत उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी भिलाई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय ने की।
समारोह का शुभारंभ अकादमिक शोभायात्रा के साथ हुआ। आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्थान की वार्षिक उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आईआईटी भिलाई छत्तीसगढ़ को प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
छत्तीसगढ़ का पहला आईटी पार्क बना नवाचार और रोजगार की नई संभावनाओं का केंद्र
निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने बताया कि आईआईटी भिलाई और छत्तीसगढ़ शासन की संयुक्त पहल से राज्य का पहला आईटी पार्क स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा सिविल लाइंस में उद्घाटित यह आईटी पार्क प्रदेश में तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार सृजन को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल है। संस्थान का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान इकोसिस्टम विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि आईआईटी भिलाई में वर्तमान में 191 अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित हैं तथा संस्थान का अनुसंधान एवं विकास बजट बढ़कर 187 करोड़ रुपए हो गया है। अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को विस्तार देते हुए संस्थान ने आईएमटी नॉर्ड यूरोप, इकोल सेंट्राल डी नांत और ग्राज़ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
निदेशक ने बताया कि आईआईटी भिलाई टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की समग्र शिक्षा पहल के सहयोग से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विद्या समीक्षा केंद्र विकसित किया गया है। इस केंद्र को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 30 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ को समर्पित किया था। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के उपयोग और प्रभावी निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
313 विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ, डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए
दीक्षांत समारोह में कुल 313 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 19 विद्यार्थियों को पीएचडी, 37 को एमएससी, 79 को एमटेक, 8 को बीटेक (ऑनर्स) तथा 170 विद्यार्थियों को बीटेक की उपाधियाँ मिलीं। डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप संस्थान द्वारा विद्यार्थियों को डिजिटल उपाधि प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह व्यवस्था तकनीकी नवाचार के साथ पर्यावरण-अनुकूल कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करती है।
कृति अरोड़ा को संस्थान स्वर्ण पदक, निधि सिंह बनीं उत्कृष्ट छात्रा
समारोह में सर्वाधिक सीजीपीए प्राप्त करने पर बीटेक की छात्रा सुश्री कृति अरोड़ा को प्रतिष्ठित संस्थान स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। बीटेक, बीटेक (ऑनर्स) और एमएससी पाठ्यक्रमों में समग्र शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सुश्री निधि सिंह को निदेशक स्वर्ण पदक (उत्कृष्ट छात्रा) से सम्मानित किया गया।
शैक्षणिक एवं पाठ्येतर गतिविधियों में उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन के लिए बीटेक वर्ग में श्री शुभम योगेश महाजन तथा एमटेक वर्ग में सुश्री जिमली पाटोवारी को निदेशक स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सीनेट पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। बीटेक वर्ग में सुश्री कृति अरोड़ा, श्री मरदोककर वेदांत भालचंद्र, श्री अनुज गुप्ता, श्री प्रशांत मालवीय और श्री धनंजय एबॉट को सम्मान मिला। एमएससी वर्ग में श्री शुभदीप पॉल, सुश्री मानवी त्यागी और श्री अनुराग हाजरा को सीनेट पुरस्कार प्रदान किए गए।
इसी प्रकार एमटेक के विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्री प्रजापत रविंद्र हिम्मतभाई, श्री अरिंदम चक्रवर्ती, श्री देबजीत सरकार, श्री ब्योमकेश पांडा, श्री नितेश सिंह भदौरिया, श्री नितेश वर्षन एम., श्री सौरव कुमार, सुश्री बसिट्टी रंजिता, श्री देबज्योति डे, सुश्री जिमली पाटोवारी, श्री यजौर किचेनमूर्ती, श्री विवेक कुमार सोनी तथा श्री अनुपम कुमार सिंह को सीनेट पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
युवा विकसित भारत के निर्माण में निभाएं महत्वपूर्ण भूमिका: डॉ. सारस्वत
मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नवाचार करने वाली प्रतिभाओं के हाथों में है। उन्होंने डीआरडीओ और नीति आयोग में अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से अपने सपनों को विकसित भारत के निर्माण के संकल्प में बदलने का आह्वान किया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय ने ग्रामीण विकास और समावेशी भारत के निर्माण में उच्च शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाकर सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति दी जा सकती है।
समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की गई। यह आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ देश और समाज के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का भी प्रतीक बना।
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