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अबूझमाड़ के जाटलूर में लगने लगा साप्ताहिक बाजार

01 May 2026   8 Views

अबूझमाड़ के जाटलूर में लगने लगा साप्ताहिक बाजार

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नारायणपुर। जिले का अबूझमाड़ एक ऐसा इलाका जिसकी पहचान दशकों तक घने जंगलों, अनसुलझे रास्तों और नक्सलवाद के खौफ से रही है, लेकिन अब यहां की हवाएं बदल रही हैं। जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 100 किलोमीटर और ब्लॉक मुख्यालय ओरछा से 35 किलोमीटर दूरी पर ओरछा ब्लाक के सुदूर गांव जाटलूर में लगने वाला साप्ताहिक बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि माड़ की बदलती तकदीर और ग्रामीणों के हौसले की नई इबारत है। जाटलूर की ओर जाते समय सबसे बड़ा बदलाव सड़क संपर्क के रूप में दिखाई देता है. पहले जहां सिर्फ जंगल, पहाड़ और संकरे रास्ते थे, अब वहां चौड़ी कच्ची सड़कें बन गई हैं। इन सड़कों को पुलिस ने तैयार किया है। इससे ग्रामीणों का ओरछा ब्लॉक मुख्यालय से सीधा संपर्क संभव हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अब सन्नाटा नहीं रहता। शनिवार को आस-पास के लोग इक_ा होते हैं, बातचीत होती है और जरूरतें पूरी होती हैं। यह बाजार हमारे लिए उम्मीद की किरण है।
कुछ समय पहले तक जाटलूर और आस-पास के ग्रामीणों के लिए नमक से लेकर सब्जी तक खरीदना एक बड़ी चुनौती थी। कलेक्टर नम्रता जैन जब क्षेत्र के भ्रमण पर पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने एक सुर में स्थानीय स्तर पर बाजार शुरू करने की मांग रखी थी। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित एक्शन लिया और अब हर शनिवार यहां रौनक बिखरने लगी है। इस बदलाव की सबसे बड़ी नींव क्षेत्र में स्थापित नए पुलिस कैंप हैं। कभी डर के साये में रहने वाले ग्रामीण अब बेखौफ होकर घर से बाहर निकल रहे हैं। पुलिस कैंपों ने न केवल नक्सली नेटवर्क को पीछे धकेला, बल्कि ग्रामीणों में यह विश्वास जगाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। यही वजह है कि कल तक जो हाथ सुरक्षाबलों को देखकर ठिठक जाते थे, वे अब बाजार में लेन-देन करते नजर आते हैं।
ग्रामीण बुधराम उसेंडी का कहना है कि पहले नक्सल दहशत के चलते इन क्षेत्रों में कोई भी व्यापारी आने से डरते थे लेकिन पुलिस कैंप स्थापित होने के बाद से ग्रामीणों को सुविधाएं मिल रही है, अब गांव में ही सोसायटी और सड़कों पर पुल की सुविधा भी मिल जाए तो अच्छा होगा। 
प्रधान आरक्षक जिला बल के मनोज ध्रुव ने बताया कि कैंप लगने से ग्रामीणों में खुशी है, जब हम नक्सलियों के लिए चलाए जाने वाले ऑपरेशन में टीम के साथ गांव आते थे, तब गांवों में दहशत थी, आज बाजार को सुरक्षा देने पहुंचे हैं तो हम भी पुलिस और ग्रामीण के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश कर रहे हैं।

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