CNIN News Network

अबूझमाड़ के जंगल में 10,000 एकड़ पर भारतीय वायुसेना के एयर टू फायरिंग रेंज बनेगा

10 Oct 2026   6 Views

अबूझमाड़ के जंगल में 10,000 एकड़ पर भारतीय वायुसेना के एयर टू फायरिंग रेंज बनेगा

Share this post with:


नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम, घने जंगलों से आच्छादित अबूझमाड़ के जंगल में बड़े सैन्य प्रोजेक्ट की नींव रखी जा चुकी है। भारतीय वायुसेना ओरछा के जंगलों में अपने लड़ाकू विमानों, घातक मिसाइलों और बमबारी के परीक्षण के लिए एक विशाल एयर टू फायरिंग रेंज तैयार करने जा रही है। इस परियोजना के लिए शासन और प्रशासन का अमला पूरे जोर-शोर से 10,000 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया में जुट गया है। मिली जानकारी के अनुसार इस फायरिंग रेंज की उपयोगिता जांचने के लिए वायुसेना ने आधुनिक सैन्य तकनीकों का इस्तेमाल किया। हेलीकॉप्टर से दिन-रात पहरा 27 अप्रैल और 2 मई 2026 को वायुसेना के विशेष हेलीकॉप्टरों ने दिन और रात, दोनों समय इलाके में लगातार उड़ान भरकर हवाई सर्वे किया था।
सर्वे के दौरान इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड उपकरणों का उपयोग किया गया, ताकि घने जंगलों के भीतर की भी सटीक मैपिंग की जा सके। 13 जुलाई 2026 की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, चिन्हित किया गया 10,000 एकड़ का इलाका नागरिक आबादी और स्थायी ढांचों से पूरी तरह मुक्त पाया गया है। हवाई सर्वे रिपोर्ट ओके होने के बाद, अब धरातल पर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। राजस्व, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर जाकर जमीन का विस्तृत भौतिक निरीक्षण पूरा कर लिया है। एसडीएम ओरछा की ओर से ग्राम सभाओं में प्रस्ताव भेजने और अनापत्ति प्रमाण-पत्र एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सैन्य उपयोग के लिए अबूझमाड़ का यह कोई पहला प्रस्ताव नहीं है। मिजोरम मॉडल पर ट्रेनिंग सेंटर करीब 15 साल पहले मिजोरम के वॉरेंगटे जंगल वारफेयर कॉलेज की तर्ज पर अबूझमाड़ के 25 वर्ग किलोमीटर जंगल में सेना का स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर बनाने की योजना तैयार की गई थी। वायुसेना की शुरुआती योजना इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद विशाल थी। सितंबर 2025 का प्रस्ताव वायुसेना ने रक्षा विभाग के माध्यम से 25 किलोमीटर लंबे और 20 किलोमीटर चौड़े भू-भाग की मांग रखी थी, जो कुल 1,34,672 एकड़ लगभग 54,500 हेक्टेयर बैठता है। इतने बड़े पैमाने पर एकमुश्त जमीन उपलब्ध कराना बेहद जटिल था, जिसके चलते 27 फरवरी 2026 को प्रस्ताव को संशोधित कर रकबा घटाकर 10,000 एकड़ कर दिया गया। अब ओरछा तहसील में 10 किमी लंबे और 04 किमी चौड़े क्षेत्र को चिन्हित किया गया है।

Share this post with:

AD R.O. No. - 14099/21

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web