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फुटबॉल खेल में जीत के लिए दो टीम के बीच जीत के लिए केवल एक गोल का अंतर होना अनिवार्य है। इस विजयी गोल के लिए टीम के ग्यारह खिलाडिय़ों के लिए निर्धारित नब्बे मिनट कम पड़ जाते है। खेल को एक्स्ट्रा टाइम दिया जाता है।
फीफा कप में 58 अवसर ऐसे आए है जब प्रतिद्वंदी टीम के खिलाडिय़ों के बजाय अपनी टीम के ही खिलाड़ी ने अपने ही गोल पोस्ट पर गोल कर सामने वाली टीम को जीतने , बराबरी करने और अपनी टीम को हार की तरफ धकेल दिया।
दुनियां की किसी भी टीम का खिलाड़ी अपने गोल पोस्ट पर क्यों गोल करना चाहेगा? लेकिन प्रतिद्वंदी टीम के आक्रमण से बचाव, बॉल को क्लियर करने या सुरक्षा कारण से ऐसे अवसर आ ही जाते है कि अपने ही गोल पोस्ट में गोल हो जाता है। इस प्रकार के गोल को 'आत्मघाती गोल कहा जाता है।
1930 में फीफा कप के शुरुवात के साथ ही आत्मघाती गोल की भी शुरुआत हो गई। मेक्सिको के मैनुअल रोसा ने अपनी ही टीम के गोल पोस्ट पर बॉल डाल दी थी। अब तक खेले गए फीफा कप में पांच आयोजन 1934, 1950,1958, 1962 और 1990 के छोड़ हर आयोजन में 'आत्मघाती गोल हुए है।
2018 के फीफा कप में रिकॉर्ड 9 आत्मघाती गोल हुए है। इसके पहले 1998 में सर्वाधिक 5 आत्मघाती गोल हुए थे। 2026 के आयोजन में अब तक 4 आत्मघाती गोल हो चुके है। 1934, और 2006 के फीफा कप में भी चार चार खिलाडिय़ों ने आत्मघाती गोल किए है।
58 अवसरों में हुए आत्मघाती गोल में नौ ऐसे मैच रहे जिसमें आत्मघाती गोल होने के बावजूद टीम जीत गई। दस मैच आत्मघाती गोल के चलते ड्रा हो गए लेकिन 39मैच में परिणाम हार के रूप में सामने आया।
फीफा कप के इतिहास में अधिकांश आत्मघाती गोल शुरुवाती दौर में हुए लेकिन 2018 के फाइनल मैच में क्रोसिया के मारियो मेड ज्यूइक ने खुद के गोल पोस्ट में सुरक्षा कारणों से पास दिया लेकिन गोल हो गया। फ्रांस ने 4-2 के अंतर से ट्रॉफी जीती थी।
2002 के फीफा कप में एक मैच ऐसा भी रहा जिसमें दोनों टीम के खिलाडिय़ों ने अपने अपने गोल पोस्ट पर गोल कर बैठे। अमेरिका और पुर्तगाल के मैच में पुर्तगाल के जॉर्ज कोस्टा और अमेरिका जेफ अंगूस ने अपने अपने गोल पोस्ट पर गोल कर बैठे थे।
यूं तो आत्मघाती गोल से परिणाम जीत या बराबरी हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन टीम के हार से खिलाड़ी और प्रशंसक ज्यादा दुखी हो जाते है। 1994 में कोलंबिया और अमेरीका के बीच खेले गए मैच में कोलंबिया के एंड्रेस एस्कोबार से आत्मघाती गोल हो गया ।कोलंबिया टूर्नामेंट से बाहर हो गई। कोलंबिया की टीम वापस देश पहुंची। नाराज प्रशंसक में एस्कोबार की गोली मार कर हत्या कर दिया था
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