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जगदलपुर। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक के चितापुर में 9 महीने पहले बारिश में टूटी पुलिया आज तक नहीं बन पाई है। हालात ऐसे हैं कि तीन गांवों के ग्रामीण, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग रोज जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं। प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। करीब 9 महीने पहले मानसून की तेज बारिश में यह पुलिया टूट गई थी। तब से अब तक ना मरम्मत हुई ना नया निर्माण शुरू हुआ ना कोई स्थायी इंतजाम किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच से लेकर विधायक, सांसद और कलेक्टर तक शिकायत की जा चुकी है, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, तस्वीरें खिंचवाईं, भरोसा दिया, लेकिन पुलिया आज भी टूटी पड़ी है।
चितापुर पंचायत की यह पुलिया कभी गांवों को जोडऩे वाला मुख्य मार्ग था, लेकिन अब यही पुलिया बदहाली की पहचान बन चुकी है। पुलिया के उस पार पंचायत भवन, स्कूल, बैंक, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकान जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। यानी तीन गांवों के लोगों के लिए यह रास्ता सिर्फ सड़क नहीं बल्कि जीवन रेखा है, लेकिन पुलिया टूटने के बाद ग्रामीणों को नाले के बीच से गुजरना पड़ रहा है। लोगों ने स्वयं पत्थर, मिट्टी और रेत की बोरियां डालकर अस्थायी रास्ता बनाया है, ताकि किसी तरह आवागमन जारी रह सके।
इस रास्ते से गुजरने वाले महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रोज अपनी जान जोखिम में डालकर इसी रास्ते को पार करते हैं। दोपहिया वाहन फिसलते हैं, लोग गिरते है, लेकिन मजबूरी है। मजबूरन गिरते पड़ते आवागमन करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में हालात और ज्यादा डरावने हो जायेंगे, पानी बढ़ते ही गांवों का संपर्क कट जायेगा। मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पांयेंगे, राशन नहीं मिलेगा और पूरा इलाका कट जायेगा। इस टूटी पुलिया का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। छोटे-छोटे बच्चे रोज बांस और लकड़ी के सहारे बने जुगाड़ू रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं। कई बच्चे फिसलकर नाले में गिर चुके हैं। किताबें भीग गईं कपड़े खराब हुए, लेकिन पढ़ाई के लिए खतरा उठाना उनकी मजबूरी बन गया है।
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