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जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में नक्सली संगठन शामिल सैकड़ों युवा नक्सलियाें काे विवाह से पहले नसबंदी कर दी गई थी। उन आत्मसमर्पित 33 पूर्व नक्सलियों का जिनका हाल ही में जगदलपुर के महारानी अस्पताल में नसबंदी रिवर्सल सर्जरी की गई है। आत्मसमर्पण करने के बाद ये पूर्व नक्सली अब सामान्य जीवन जीना चाहते हैं, और पिता बनने के लिए अपनी नसबंदी खुलवा रहे हैं। 8 लाख रुपए के इनामी डीव्हीसीएम कैडर के पूर्व नक्सली शंकर मुचाकी ने खुलासा करते हुए बताया था कि, वर्ष 2014 में झारखंड से आए डॉक्टर रफीक ने नसबंदी और छोटे-मोटे ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग नक्सलियाें काे दी थी। इसके बाद जंगलों के भीतर ही नक्सलियों की नसबंदी की जाने लगी।
वेस्ट जोन यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की टीम इस विशेष अभियान में शामिल है। सोसायटी के कोषाध्यक्ष डॉ. सुशील राठी ने बताया कि डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. सुरेश सिंह, डॉ. सत्यदेव शर्मा, डॉ. राघवेंद्र सहित 20 से 30 लोगों की टीम जगदलपुर पहुंची है। उन्होंने कहा कि हमें जानकारी मिली थी कि कई आत्मसमर्पित नक्सलियों की नसबंदी हो चुकी है और वे अब सामान्य पारिवारिक जीवन जीना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से नसबंदी रिवर्सल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। बड़े निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन पर करीब 1 से 1.5 लाख रुपए तक खर्च आता है।
महारानी अस्पताल जगदलपुर के सिविल सर्जन डॉक्टर संजय प्रसाद ने बताया कि बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से चिन्हित 60 से ज्यादा पूर्व नक्सलियों की नसबंदी रिवर्सल की प्रक्रिया चल रही है। उन्हाेने बतया कि पहले चरण में दो दिनों के भीतर 33 पूर्व नक्सलियों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है।
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