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20 उप मुख्यमंत्री की नसीब में लिखा मुख्यमंत्री बनना

05 Jul 2023   672 Views

20 उप मुख्यमंत्री की नसीब में लिखा मुख्यमंत्री बनना

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** संजय दुबे **

अजीत पवार चौथी बार उप मुख्यमंत्री की शपथ लेकर महाराष्ट्र में ऐसे व्यक्ति हो गए है जो भारत के सर्वाधिक 5 बार उप मुख्यमंत्री बनने वाले विल्फ्रेड डिसूजा के 5 बार उप मुख्यमंत्री बनने के रिकॉर्ड से केवल एक पायदान नीचे है। अजीत पवार 07 दिसम्बर 2012 से 28 सितम्बर 2014,23 नवम्बर 2019 से 28 नवम्बर 2019  औऱ30 दिसम्बर 2019 से29 जून 2023 की अवधि में उप मुख्यमंत्री रह चुके है। छतीसगढ़ में हाल ही टी एस सिंहदेव  प्रथम उप मुख्यमंत्री बने है। छतीसगढ़ के साथ ही जन्मे झारखंड में सुरेश महतो तीन बार उप मुख्यमंत्री बन चुके है। दो उप मुख्यमंत्री रघुवर दास औऱ हेमंत सोरेन आगे चलकर मुख्यमंत्री भी बन गए।

आज़ादी के बाद से देश के 28 राज्यो  में 118 उप मुख्यमंत्री  सत्ता संतुलन   के लिए बनाए गए है। ये उपमुख्यमंत्री जातीय , क्षेत्रीय, संख्याबल अथवा मुख्यमंत्री के समांतर शक्ति संतुलन के लिए भी बनाये गए है। आंध्रप्रदेश ऐसा राज्य है जहां अब तक 18 उपमुख्यमंत्री  बनाये गए है।  आंध्र प्रदेश के 2019 से स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद 5 उप मुख्यमंत्री रखने की  अनोखी परंपरा चल रही है। गोवा जैसे छोटे राज्य में राजनैतिक अस्थिरता ने  महज 42 साल में 9 उप मुख्यमंत्री दिए है। विल्फ्रेड डिसूजा तो पहले दो बार उप मुख्यमंत्री बने फिर  मुख्यमंत्री बने फिर फिर उप मुख्यमंत्री बनते गए।अलग अलग  अवधि में उप मुख्यमंत्री बने। विल्फ्रेड डिसूजा पांच बार उप मुख्यमंत्रीऔऱ तीन बार मुख्यमंत्री भी बनते रहे। उनके बाद तमिलनाडु के पनीर सेवलम भी मुख्यमंत्री बनने के बाद उप मुख्यमंत्री बने । देवेंद्र फडणवीस तीसरे ऐसे मुख्यमंत्री रहे है जो आगे उप मुख्यमंत्री  बने।

देश के आज़ाद होने के बाद बिहार राज्य में 2 अप्रैल 1948 को डॉ अनुग्रह लाल सिन्हा देश के पहले उपमुख्यमंत्री बने उनके बाद 118 उपमुख्यमंत्री फेरहिस्त में सबसे नवीन उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव है। आमतौर पर उप मुख्यमंत्री बने व्यक्ति  की महत्वाकांक्षा जरूर रहती होगी कि राज्य के राज्यपाल से विधिवत मुख्यमंत्री पद की शपथ ले क्योकि उप मुख्यमंत्री पद संवैधानिक नहीं है बल्कि राजनीति के शातिर लोगो ने इस पद सृजन शक्ति संतुलन के लिए किया है।

अब तक18मुख्यमंत्री, ऐसे रहे है जो पूर्व मे उप मुख्यमंत्री  रहे है। 2 उप मुख्यमंत्री पनीर सेवलम( तमिलनाडु) औऱ देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र) पहले मुख्यमंत्री बने बाद में उप मुख्यमंत्री बने। 12 राज्य जहाँ वर्तमान में उप मुख्यमंत्री  पद पर कार्य करने वाले जरूर उम्मीद कर सकते है। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी. शिवकुमार  पहले उप मुख्यमंत्री होंगे जिन्हें  भविष्य का  मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया है कि वे दूसरे ढाई साल के मुख्यमंत्री होंगे। ये बात दबी रूप में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के लिए भी हवा में रही  शायद डी शिवकुमार ये देख चुके थे यही करके  खुले तौर पर घोषणा करवा ली।

भारत के 28 राज्यो में से 12  राज्य ऐसे रहे जहां उप मुख्यमंत्री भविष्य में मुख्यमंत्री बने। आंध्र प्रदेश के नीलम संजीव रेड्डी  1953 में उप मुख्यमंत्री बने और 1956 में मुख्यमंत्री  बनने वाले व्यक्ति थे कर्नाटक में सर्वाधिक 4 उप मुख्यमंत्री, एम कृष्णा,जे एच पटेल, सिद्धारमैया औऱ येदुरप्पा मुख्यमंत्री बने। चिमनभाई पटेल और केशुभाई पटेल(गुजरात),  ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य( प. बंगाल),  नीलमणि राउतराय, हेमचंद्र बिस्वाल(उड़ीसा), स्टालिन औऱ पनीर सेवलम ( तमिलनाडु), रघुवर दास ,हेमंत सोरेन ( झारखंड) कमलापति त्रिपाठी(उत्तर प्रदेश),कर्पूरी ठाकुर( बिहार),  वीरेंद्र कुमार सखलेचा ( मध्यप्रदेश), मो कोया (केरल), विल्फ्रेड डिसूजा (गोवा), नीलम संजीव रेड्डी(आंध्र प्रदेश) के हिस्से में मुख्यमंत्री बनना आया।

महाराष्ट्र के छगन भुजबल तीन बार उप मुख्यमंत्री बनाये गए है  सुशील मोदी तेजस्वी यादव ( बिहार),  नीलम संजीव रेड्डी, ए.  बी. शेख बयारी (आंध्र प्रदेश), जी. परमेश्वर (कर्नाटक), सुरेश महतो (झारखंड ) दो दो बार उप मुख्यमंत्री बन चुके है। आंध्र प्रदेश के ए बी शेख बयारी, के नारायण स्वामी, बिहार के सुशील मोदी उत्तर प्रदेश के  केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक लगातार दूसरे बार  उप मुख्यमंत्री बने है। पंजाब के सुखबीर सिंह बादल भी इस कड़ी में शामिल है।

सबसे अधिक समय तक उप मुख्यमंत्री बने रहने का रिकार्ड किश्तों में सही गोआ के विल्फ्रेड डिसूजा के पास है वे 8 साल 235 दिन तक उप मुख्यमंत्री रहे। पंजाब के सुखबीर सिंह बादल लगातार 7 साल 218 दिन उप मुख्यमंत्री रहे है। सबसे कम 5 दिन के लिए अजीत पवार ही उप मुख्यमंत्री बने है। राजनीति में रुचि रखने वालों के लिए उप मुख्यमंत्री विषय पर बहस करने के लिए ये लेख उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले प्रतिस्पर्धियों को।

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