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0-सुबह 6 ग्रहों की कतार और दोपहर में दिखेगा सूर्य ग्रहण
0-अमावस्या की काली रात में होगी चमकदार उल्कापिंडों की बारिश
नई दिल्ली। आगामी 12 अगस्त 2026 का दिन दुनिया भर के अंतरिक्ष प्रेमियों और खगोलविदों के लिए एक यादगार और दुर्लभ अवसर साबित होने वाला है। इस एक ही दिन, मात्र 24 घंटे की समयावधि के भीतर आसमान में तीन अद्भुत खगोलीय घटनाएं एक साथ घटित होंगी। सुबह तड़के छह ग्रहों की एक सीधी रेखा में परेड, दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण और रात के समय टूटे हुए तारों (उल्कापिंडों) की शानदार आतिशबाजी का यह अनोखा त्रिवेणी संयोग दशकों में कभी-कभार ही देखने को मिलता है।
0--तड़के दिखेगी 6 ग्रहों की भव्य कतार
12 अगस्त को सूर्योदय से करीब आधा से एक घंटे पहले आसमान में एक दुर्लभ दृश्य दिखाई देगा। इस दौरान बुध, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून - ये छह ग्रह एक साथ एक कतार में सजे नजर आएंगे।
नंगी आंखों से दृश्य--मंगल, बृहस्पति और शनि ग्रह को बिना किसी विशेष यंत्र के सीधे देखा जा सकेगा।
दूरबीन की आवश्यकता--यूरेनस और नेपच्यून को स्पष्ट रूप से देखने के लिए बाइनोक्युलर्स या टेलीस्कोप की मदद लेनी होगी।
0--दोपहर में यूरोप में छाएगा अंधेरा--पूर्ण सूर्य ग्रहण
दिन के समय एक विशालकाय पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। वर्ष 1999 के बाद यह पहला मौका होगा जब मुख्य यूरोपीय भूभाग से पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।
मुख्य मार्ग--यह ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के हिस्सों से होकर गुजरेगा।
अवधि-आइसलैंड के समुद्री क्षेत्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक समय (लगभग 2 मिनट 18 सेकंड) तक रहेगा।
आंशिक प्रभाव-यूरोप के अन्य भागों, कनाडा तथा उत्तरी अमेरिका में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखेगा।
सुरक्षा सलाह-वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि बिना प्रमाणित सौर चश्मे के सूरज की ओर सीधे देखना दृष्टि के लिए घातक साबित हो सकता है।
0--रात को पर्सिड्स उल्कापिंडों की चमकदार बारिश
दिन ढलने के बाद अंतरिक्ष का तीसरा सबसे खूबसूरत नजारा शुरू होगा। पर्सिड उल्का बौछार अपने चरम पर होगी। सूर्य ग्रहण का दिन होने के कारण इस रात अमावस्या रहेगी, जिससे आसमान पूरी तरह से अंधेरा और चंद्रमा की रोशनी से मुक्त रहेगा। अंधेरा अधिक होने के चलते हर घंटे लगभग 100 तक जलते हुए उल्कापिंड (तारे टूटते हुए) साफ तौर पर देखे जा सकेंगे। इन तीनों बड़ी खगोलीय परिघटनाओं का एक ही तिथि पर घटित होना खगोलीय इतिहास की सबसे दुर्लभ घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो
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