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निर्भया जैसी हैवानियत! लिफ़्ट देकर चलती स्लीपर बस में 11वीं की छात्रा से गैंगरेप

31 Aug 2026   36 Views

 निर्भया जैसी हैवानियत! लिफ़्ट देकर चलती स्लीपर बस में 11वीं की छात्रा से गैंगरेप

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०-ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ़्तार

 

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 11वीं क्लास की 16 वर्षीय छात्रा के साथ ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच चलती स्लीपर बस के अंदर ड्राइवर और कंडक्टर ने दरिंदगी की। यह खौफनाक वारदात 4 अगस्त की रात ग्रेटर नोएडा के परी चौक से पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट  (लगभग 47 किलोमीटर) के बीच हुई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों—ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप—को उत्तर दिल्ली के तिमारपुर इलाके से गिरफ़्तार कर लिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मैनपुरी ज़िले की रहने वाली 11वीं क्लास की छात्रा अपने परिवार को बताए बिना घर से निकली थी और नोएडा में अपने कजऩि से मिलने जा रही थी। भारी बारिश और अंधेरे के बीच, वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुँच गई।

उस इलाके से गुजऱ रही एक खाली स्लीपर बस लड़की के इशारा करने पर रुकी। ड्राइवर और कंडक्टर ने उससे कहा कि वे नोएडा सेक्टर 63 जा रहे हैं और उसे वहाँ छोडऩे की पेशकश की।

लड़की के अनुसार, बस के चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। डीसीपी भट्ट ने बताया कि इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ रेप किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।आरोपियों ने उसे उसी रात बाद में कश्मीरी गेट आईएसबीटी के पास रिंग रोड पर उतार दिया और भाग गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसके बाद लड़की कश्मीरी गेट पुलिस के पास पहुँची और घटना की जानकारी दी।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को नॉर्थ दिल्ली के तिमारपुर में एक बस पार्किंग लॉट से गिरफ़्तार किया। मामले की जांच चल रही है और पुलिस ने ज़ब्त की गई स्लीपर बस को फ़ोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बस में पहले खराबी आ गई थी और उसे मरम्मत के लिए ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर इलाके में एक वर्कशॉप में ले जाया गया था। मरम्मत के बाद, कुलदीप और संदीप खाली बस को वापस तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी परी चौक पर उन्हें वह लड़की मिली। पुलिस ने बताया कि स्लीपर बस में पर्दे लगे थे, जिसका मतलब था कि घटना के समय बाहर के लोग गाड़ी के अंदर नहीं देख सकते थे।

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