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महाविद्यालय के प्रथम बैच के तीन विद्यार्थियों सहित पूर्व अधिष्ठाताओं एवं पूर्व छात्रों का किया गया सम्मान
वार्षिकोत्सव और छात्र संघ शपथ ग्रहण भी आयोजित
आकर्षक एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
रायपुर,--



कृषि महाविद्यालय रायपुर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक तथा अविस्मरणीय रहा जब यहां इतिहास, वर्तमान एवं भविष्य का संगम देखने को मिला। कृषि महाविद्यालय, रायपुर के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिवार की तीन पीढ़ियां एकत्र हुई जिनमें कृषि महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता एवं प्राध्यापक, वर्तमान कुलपति, कुलसचिव एवं प्राध्यापकगण और वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थी सम्मिलित थे। इस अवसर पर महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव समारोह, छात्र संघ शपथ ग्रहण, पूर्व अधिष्ठाता सम्मान तथा पूर्व छात्र सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया जिसके तहत महाविद्यालय के प्रथम बैच के तीन विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के खास मुकाम हासिल करने वाले भूतपूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही महाविद्यालय के सात पूर्व अधिष्ठाताओं और इसी महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति, कुलसचिव तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का भी सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के पश्चात आयोजित वार्षिकोत्सव समारोह में कृषि महाविद्यालय, रायपुर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक रंगा-रंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शक-दीर्घा का मन मोह लिया।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषक सभागार में आज दोपहर आयोजित स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल थे। डॉ. चंदेल ने इस अवसर पर नवगठित छात्र संघ के पदाधिकारियों को पद सन्निष्ठा एवं अनुशासन की शपथ दिलाई। एम.एससी. कृषि सांख्यिकी विभाग की छात्रा पुण्य श्री ने अध्यक्ष तथा बी.एससी. चतुर्थ वर्ष की छात्रा अनुष्का चौरसिया ने उपाध्यक्ष पद की शपथ ली। मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालय, रायपुर विश्वविद्यालय से भी पुराना एवं ऐतिहासिक संस्थान है, जिसने प्रदेश ही नहीं बल्कि देश को अनेक उत्कृष्ट कृषि विशेषज्ञ एवं प्रशासक दिए हैं। समारोह में महाविद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. आरती गुहे ने महाविद्यालय के 66 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा, उपलब्धियों एवं स्थापना दिवस समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि कृषि नेतृत्व गढ़ने वाली एक सशक्त परंपरा है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रथम बैच के पूर्व विद्यार्थियों एवं सेवानिवृत्त प्राध्यापकों डॉ. एम.आर.एच. सिद्धीकी, डॉ. आर.के. साहू एवं डॉ. वी.एन. साहू को सम्मानित किया गया। साथ ही पूर्व अधिष्ठाताओं डॉ. एस.एस. बघेल, डॉ. एम.एन. श्रीवास्तव, डॉ. ओ.पी. कश्यप, डॉ. एस.आर. पटेल, डॉ. एम.पी. ठाकुर, डॉ. के.एल. नंदेहा एवं डॉ. जी.के. दास को उनके शैक्षणिक एवं अनुसंधान योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने वाले पूर्व छात्रों का सम्मान भी समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। सम्मानित पूर्व छात्रों में श्री अनिल कुशवाहा (सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक), श्रीमती गोपिका गबेल (संयुक्त संचालक कृषि एवं महाविद्यालय की प्रथम महिला छात्रा), श्री के.आर. बढ़ई (मुख्य वन संरक्षक), श्री मनमोहन सिंह (उद्यमी), श्री हर्ष चंद्राकर (प्रगतिशील कृषक), श्री आर.के. कश्यप (संयुक्त संचालक कृषि) एवं श्री यशवंत केराम (कुलसचिव, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग) शामिल थे। महाविद्यालय पूर्व छात्र श्री अनिल कुशवाहा एवं श्री के.आर. बढ़ई ने अपने प्रेरक अनुभव साझा कर विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, समर्पण एवं निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।
सम्मान समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा, संचालक अनुसंधान डॉ. वी.के. त्रिपाठी, निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.एस. टूटेजा भी इसी महाविद्यालय के भूतपूर्व छात्र रहे हैं अतः इस अवसर पर उनको भी सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि कृषि महाविद्यालय रायपुर की स्थापना 22 मई 1961 को हुई थी। शुरूआत में यह महाविद्यालय कवर्धा बाड़ा बैरन बाजार में लगता था। वर्तमान भवन में यह महाविद्यालय वर्ष 1964 से संचालित किया जा रहा है। प्रारंभिक दौर में यह महाविद्यालय डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के अंतर्गत संचालित था जो वर्ष 1964 में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर और उसके पश्चात 20 जनवरी 1987 से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत संचालित हो रहा है।
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