CNIN News Network

सवाल 65 लाख बिहारी वोटर्स का है?

26 Aug 2025   872 Views

सवाल 65 लाख बिहारी वोटर्स का है?

Share this post with:

देश के सबसे जटिल जाति व्यवस्था के लिए विख्यात बिहार राज्य में विधान सभा चुनाव आसन्न है।बिहार राज्य के चुनाव में मुख्य रूप से एनडीए और इंडी गठबंधन के दो मुख्य भागीदार कांग्रेस और आरजेडी के बीच सत्ता के लिए रस्साकसी है। कौन बाजी मारेगा  ये तो ईवीएम बताएगा  लेकिन  ईवीएम के कर्ताधर्ता चुनाव आयोग को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घेरे में लाने के लिए बिहार में यात्रा कर रहे है। इसके कई कारण है। यात्रा का प्रमुख कारण  है कि एन चुनाव से पहले 65लाख वोटर सूची से बाहर कर दिए गए है जो वोटर पुनरीक्षण अभियान के दौरान मौके से नदारत थे। सांप सूंघ गया विपक्ष को। 7.24करोड़  वोटर्स में से लगभग 9 फीसदी वोटर्स के नाम कट गए है। जब एक फीसदी वोट के अंतर से सत्ता इधर उधर हो जाती है तब  नौ फीसदी वोट बहुत मायने रखता है।

बहरहाल, बिहार में विपक्ष तो  आमने सामने है। सर्वोच्च न्यायालय  का हस्तक्षेप भी हुआ। जिन 65लाख वोटर्स के नाम विलोपित हुए है उन्हें एक अवसर मिला है। 31अगस्त 2025तक उन्हें अपने होने का दस्तावेज जमा करना है।

अभी तक केवल 1.40लाख वोटर्स ने नियमानुसार  दावा किया है। इससे इस बात की पुष्टि तो हो रही है कि बिहार से पलायन कर दूसरे राज्यों में बसे वोटर्स ने अपना नाम जिस राज्य में रह रहे है वहां  जुड़वा लिया है।ये भी सच है कि चूंकि उन्होंने बिहार से नाम कटवाया नहीं है(देश में बहुत कम सजग लोग होंगे जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते है तो वोटर लिस्ट से नाम कटवाते है)

ये बात भी माननी पड़ेगी कि देश और राज्य के चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को सुधारने के लिए सार्थक प्रयास नहीं किया। भारत ने उज्ज्वला  गैस योजना शुरू हुई तो तीनों  गैस कंपनी ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया जिसमें किसी भी गैस उपभोक्ता के पास भारत के किसी भी स्थान में कनेक्शन होने पर दूसरा कनेक्शन नहीं मिल सकता है। इसमें आधार लिंक भी है।ये बारह साल पुरानी बात है। चुनाव आयोग को भी ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप करना चाहिए था।   देश में अगर कोई भी व्यवस्था में खोट है कमी है तो उसे दूर करना ही चाहिए।

भारत में 99.10करोड़ वोटर्स है। अगर बिहार के ही  विलोपित वोटर्स प्रतिशत 9 को ही आधार मान ले तो देश में दस करोड़ वोटर्स ऐसे है जिनका नाम एक से अधिक स्थानों में वोटर लिस्ट में है।

इस सुधार से एक फायदा और होगा ।चुनाव में वोट न डालने वालों की संख्या में भी इतने ही प्रतिशत की कमी आएगी। याने वोटिंग परसेंटेज भी दस फीसदी बढ़ जाएगा।

सभी राजनैतिक दल बूथ के आधार पर अपनी रणनीति बनाते है।उनकी भी महती जिम्मेदारी है कि गंदगी साफ करने के लिए आगे आए। गाल बजाने के बजाय हाथ चलाने से काम आसान होते है

🖊️ संजय दुबे

Share this post with:

AD RO NO - 13404/20

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web