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पहले बीसीसी व डीसीसी अब फिर से बीसीसी की बात हो रही है - ठाकुर

08 May 2026   25 Views

पहले बीसीसी व डीसीसी अब फिर से बीसीसी की बात हो रही है - ठाकुर

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने प्रदेश कांग्रेस में मचे घमासान और पीसीसी अध्यक्ष पद के लिए छिड़ी वर्चस्व की जंग पर करारा कटाक्ष किया है। श्री ठाकुर ने कहा कि पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) का वजूद अब तक बीसीसी (भूपेश कांग्रेस कमेटी) बनाम डीसीसी (दीपक कांग्रेस कमेटी) में बँटा हुआ था पर अब एक धड़े बीसीसी (बाबा कांग्रेस कमेटी) की एण्ट्री ने कांग्रेस के दयनीय हो चले संगठनात्मक ढाँचे की पटकथा जगजाहिर कर दी है। जिस कांग्रेस का संगठनात्मक ढाँचा पूरी तरह रसातल की ओर अग्रसर है, वहाँ अब कुर्सी के लिए अंतर्कलह का नग्न प्रदर्शन हो रहा है, यानी पहले बीसीसी थी, बाद में डीसीसी हुई और अब फिर से बीसीसी की बात हो रही है
ठाकुर ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव द्वारा प्रदेशाध्यक्ष बनने की इच्छा जताने मात्र से भूपेश बघेल और दीपक बैज खेमे में जो बेचैनी बढ़ी है, वह इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस अब कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि गुटों में बँटा एक व्यापारिक संगठन बन चुका है। श्री ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस में ढाई-ढाई साल का जो सर्कस सत्ता में रहने के दौरान चला था, वही अब संगठन में दोहराया जा रहा है। विडम्बना देखिए कि जो नेता अपनी विधानसभा सीट तक नहीं बचा पाए, वे अब पूरी पार्टी को सम्भालने का दावा कर रहे हैं। जनता ने जिन्हें नकार दिया, वे अब संगठन में कब्जा जमाकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता तलाश रहे हैं। एक ओर सिंहदेव अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं, दूसरी ओर भूपेश बघेल फिर से अध्यक्ष बनने की फिराक में हैं, तो वहीं दीपक बैज अपनी कुर्सी बचाने के लिए छटपटा रहे हैं। उमेश पटेल और देवेंद्र यादव के नामों की चर्चा केवल इस आग में घी डालने का काम कर रही है। कांग्रेस की यह म्यूजिकल चेयर रेस छत्तीसगढ़ की जनता देख रही है। 
ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि जिस पार्टी के पास न नीति है, न नीयत और न ही कोई सर्वमान्य नेता, उसका हश्र यही होना है। बैज के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा, लोकसभा और उपचुनावों में हार की हैट्रिक लगाई है। अब हार के इस मलबे के मालिकाना हक जताकर कौन-सा गुट झण्डा फहराएगा, इसकी होड़ लगी है। ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को केवल इस बात की चिंता है कि आलाकमान की दहलीज पर किसकी हाजिरी ज्यादा दमदार होगी? कांग्रेस एक ऐसा जहाज है जो अपने ही बोझ और आंतरिक कलह के कारण डूब रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार कर हाशिए पर धकेल दिया है, लेकिन कांग्रेसी नेता अभी भी मुगालते में हैं। जिस संगठन में तालमेल की जगह केवल खींचतान हो, उसका भविष्य केवल अंधकारमय है। कांग्रेस के भीतर चल रही बूथ और मंडल कमेटियों की आंतरिक जाँच की खबरों के मद्देनजर श्री ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि एक बार फिर यह साबित हो गया है कि कांग्रेस संगठन अब केवल कागजों और ई-पेपर्स तक ही सीमित रह गया है। जिस संगठन को जनता के बीच होना चाहिए था, वह अब अपने ही कार्यकर्ताओं के अस्तित्व को तलाशने के लिए कनेक्ट सेंटर और फोन कॉल्स का सहारा ले रहा है। पीसीसी द्वारा मण्डल व बूथ कमेटियों की जाँच यह दर्शाती है कि नेतृत्व को अपने ही पदाधिकारियों पर भरोसा नहीं है। जब संगठन को चुनाव की तैयारियों में जुटना चाहिए, तब वह यह जाँचने में व्यस्त है कि कमेटियों में भेजे गए नाम असली हैं या केवल 'टारगेटÓ पूरा करने के लिए बिना जानकारी के शामिल किए गए हैं।

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