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सुकमा। जिले का सबसे संवेदनशील और कभी नक्सल आतंक का गढ़ माना जाने वाला पूवर्ती गांव अब बदलती तस्वीर की मिसाल बन रहा है। माड़वी हिड़मा और देवा बारसे के गांव पूवर्ती में पहली बार जनगणना का काम रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ है। यही नहीं, सुकमा जिले में सबसे पहले जनगणना पूरी करने वाला गांव भी पूवर्ती बना है। कभी जहां डर और बंदूक की चर्चा होती थी, वहां अब विकास, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक पहुंच की बातें हो रही हैं। नक्सली हिड़मा के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद देवा ने आत्म समर्पण किया। जिसके बाद प्रशासन की टीम के लिए गांव तक जाने का रास्ता खुल गया। पहली बार पूवर्ती गांव की जनगणना हुई है, जिससे आबादी का पता चल पाया है।कलेक्टर अमित कुमार ने जवाराम पटेल के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में इस तरह जिम्मेदारी निभाना दूसरे जनगणना कर्मियों के लिए प्रेरणादायक है।
मिली जानकारी के अनुसार कोंटा विकासखंड अंतर्गत पूवर्ती गांव में जनगणना के प्रथम चरण का कार्य महज तीन दिनों में पूरा कर लिया गया। लगभग 950 से अधिक आबादी और 234 मकानों वाले इस गांव में दो आंगनबाड़ी केंद्र और एक स्कूल संचालित है। कभी सुरक्षाबलों और नक्सलियों की गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहने वाला यह गांव अब प्रशासनिक पहुंच और विकास कार्यों की नई पहचान बन रहा है। जनगणना कार्य की जिम्मेदारी संभालने वाले सहायक शिक्षक जवाराम पटेल के लिए यह काम आसान नहीं था। स्थानीय गोंडी बोली की समझ सीमित होने से बातचीत में दिक्कतें आईं, लेकिन उन्होंने स्थानीय शिक्षकों की मदद ली और हर घर तक पहुंचकर सर्वे पूरा किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद गांव में जनगणना का काम समय पर पूरा हुआ।
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